विकास परियोजनाओं में कटते पेड़
नई दिल्ली, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने केंद्र और दिल्ली की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तथाकथित विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई, जिसने राजधानी को प्रदूषण के संकट की ओर और धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि द्वारका एक्सप्रेस-वे और यूईआर-2 जैसे प्रोजेक्ट्स में हजारों पेड़ काटे गए, लेकिन उनके बदले किए जाने वाले वृक्षारोपण में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
देवेंद्र यादव के अनुसार, द्वारका एक्सप्रेस-वे और यूईआर-2 के लिए कुल 2,18,070 पेड़ लगाने की जिम्मेदारी डीडीए को दी गई थी। इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने लगभग 142.87 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी किया, ताकि दिल्ली में ग्रीन कवर बढ़ाया जा सके। हालांकि संयुक्त निरीक्षण और बैठकों में यह पाया गया कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले आधे से भी कम पौधे लगाए गए हैं, जो सरकार और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने आगे बताया कि द्वारका एक्सप्रेस-वे के तहत 2020 में 1,53,990 पेड़ लगाने थे, लेकिन जमीनी स्तर पर केवल करीब 75,000 पौधे ही मौजूद मिले। इसी तरह यूईआर-2 परियोजना में 64,080 पेड़ों के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 24,887 पौधे पाए गए। यादव ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह की लापरवाही या संभावित भ्रष्टाचार सामने आता है, तो दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रीन कवर बढ़ाना सबसे स्थायी उपाय है, लेकिन भाजपा सरकार घोषणाओं और अभियानों से आगे नहीं बढ़ पाई। वन महोत्सव और “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डीडीए और सरकार इसी तरह निष्क्रिय रहीं, तो दिल्ली को प्रदूषण का खामियाजा लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा।