झुग्गी बस्तियों के विकास और पुनर्वास को लेकर दिल्ली में राजनीतिक बहस तेज
नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026।
दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “जहां झुग्गी वहीं मकान” का वादा निभाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उनका कहना है कि झुग्गियों को तोड़ने के बाद अब बची हुई बस्तियों में जनसुविधा कॉम्पलेक्स, नए शौचालय और पक्की गलियों के नाम पर योजनाओं की घोषणा कर गरीबों को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि असली जरूरत स्थायी आवास और सम्मानजनक जीवन की है।
झुग्गी बस्तियों के नाम पर विकास का दावा
देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने हाल ही में झुग्गी बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं के लिए 327 करोड़ रुपये की योजनाओं की मंजूरी का दावा किया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम झुग्गीवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय उन्हें हाशिए पर बनाए रखने की रणनीति है। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में गरीबों की स्थिति सुधारना चाहती, तो सबसे पहले स्थायी आवास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती।
पुनर्वास का सवाल और सरकार से जवाब की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सीधा सवाल किया कि पिछले 11 महीनों में उजाड़ी गई झुग्गी बस्तियों के कितने परिवारों को वैकल्पिक आवास या फ्लैट आवंटित किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में झुग्गीवासियों को नए स्थानों पर बसाने की योजना है, तो वहां पहले से रोजगार, परिवहन, पानी, बिजली, सीवर, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बिना इन व्यवस्थाओं के पुनर्वास सिर्फ कागजी साबित होगा।
अटल कैंटीन पर उठे सवाल
देवेंद्र यादव ने अटल कैंटीन योजना पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि झुग्गी बस्तियों के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय सरकार 5 रुपये की थाली देकर उन्हें असहाय बनाए रखना चाहती है। उनके अनुसार, एक अटल कैंटीन में एक समय में सीमित संख्या में भोजन उपलब्ध होता है, जिससे लाखों झुग्गीवासियों की जरूरत पूरी नहीं हो सकती। वर्तमान में केवल 45 से 50 कैंटीन के सहारे 675 से 750 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करीब 20 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का दावा अव्यावहारिक है।
सफाई और स्वच्छता अभियान पर सवाल
कांग्रेस नेता ने दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में सफाई व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगस्त से शुरू हुआ स्वच्छता अभियान कई महीनों तक चलने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता। बारिश के मौसम में झुग्गी इलाकों में जलभराव और कूड़े के ढेर लोगों की जिंदगी को और मुश्किल बना रहे हैं। किराड़ी के शर्मा एन्क्लेव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां तीन से चार फीट तक पानी और कचरा भरा होना सरकार की कार्यशैली और नाकामी को उजागर करता है।
स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं की पहुंच पर सवाल
देवेंद्र यादव ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, आयुष्मान कार्ड और अन्य स्वास्थ्य व पोषण योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ये योजनाएं कागजों और आयोजनों तक सीमित हैं और झुग्गी बस्तियों के जरूरतमंद लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार इवेंट मैनेजमेंट के जरिए योजनाओं को इस तरह पेश करती है जैसे दिल्ली में व्यापक विकास हो रहा हो, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनहित
झुग्गी बस्तियों का मुद्दा दिल्ली की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है। लाखों लोग इन बस्तियों में रहते हैं, जिनकी आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य सीधे सरकारी नीतियों से प्रभावित होती है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक झुग्गीवासियों को स्थायी आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक किसी भी योजना को वास्तविक विकास नहीं कहा जा सकता।