बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता रथ को रवाना करते जनप्रतिनिधि और अधिकारी
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सोनीपत में ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई। गुरुवार को लघु सचिवालय परिसर से युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता राज्यमंत्री गौरव गौतम ने बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रधानमंत्री के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा और समाज में व्यापक संवाद स्थापित करेगा।
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त वातावरण में बड़े, ताकि वह राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके।
अभियान का उद्देश्य और कार्ययोजना
बाल विवाह मुक्ति रथ का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि लोगों को कानून, अधिकार और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। रथ के माध्यम से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर प्रचार सामग्री, जनसंवाद, नुक्कड़ बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें बाल विवाह के दुष्परिणाम, कानूनी प्रावधान और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विशेष जोर रहेगा।
राज्यमंत्री गौरव गौतम ने बताया कि अभियान का फोकस माता-पिता, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों तक सीधी पहुंच बनाना है। उनका कहना था कि जब तक समाज स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
बाल विवाह के सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव
बाल विवाह के कारण बच्चों की शिक्षा अधूरी रह जाती है और किशोरियों में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ती हैं। कम उम्र में विवाह से मातृ और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि का खतरा रहता है, साथ ही मानसिक और सामाजिक विकास भी बाधित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाल विवाह पीढ़ियों तक चलने वाली असमानताओं को जन्म देता है, जिससे सामाजिक प्रगति प्रभावित होती है।
सरकार और प्रशासन का मानना है कि समय रहते जागरूकता और हस्तक्षेप से इस कुरीति को रोका जा सकता है। इसी सोच के तहत बाल विवाह मुक्ति रथ को एक चलती-फिरती कक्षा की तरह तैयार किया गया है, जहां लोग खुलकर सवाल पूछ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें।
जनभागीदारी पर जोर
राज्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों की समय पर सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। जनभागीदारी के बिना यह लड़ाई अधूरी है, और जब समाज साथ आता है, तभी स्थायी बदलाव संभव होता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार कानून के साथ-साथ संवेदनशीलता को भी प्राथमिकता दे रही है, ताकि पीड़ित परिवारों को डर के बजाय सहयोग का भरोसा मिले।
जनप्रतिनिधियों का समर्थन
इस अवसर पर खरखौदा विधायक पवन खरखौदा ने कहा कि बाल विवाह समाज के लिए एक गंभीर अभिशाप है, जिसे समाप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ को केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि समाज सुधार का आंदोलन बताया। विधायक ने विश्वास जताया कि जागरूकता रथ के माध्यम से प्रधानमंत्री का संदेश घर-घर पहुंचेगा और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त भविष्य मिलेगा।
प्रशासनिक समन्वय और निगरानी
कार्यक्रम में उपायुक्त सुशील सारवान, अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन, जिला परिषद चेयरपर्सन मोनिका दहिया, एसडीएम सुभाष चंद्र, डीसीपी नरेन्द्र कादियान, नगराधीश डॉ. अनमोल, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक भारद्वाज, एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला संयोजक डॉ. राज सिंह सांगवान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रितु गिल सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बाल संरक्षण इकाइयों, शिक्षा विभाग और पुलिस के बीच समन्वय बनाकर निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
कानून और अधिकारों की जानकारी
अभियान के तहत लोगों को यह भी बताया जाएगा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह कराना या इसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है। इसके साथ ही पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और स्वास्थ्य सहायता से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की जाएगी, ताकि जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।