जिला सचिवालय में सड़क सुरक्षा और सुरक्षित स्कूल वाहन नीति की समीक्षा बैठक
पलवल जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को जिला सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति एवं सुरक्षित स्कूल वाहन नीति की मासिक समीक्षा बैठक में उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सड़क हादसों में पीड़ितों ने हेलमेट पहना होता, तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं आज देश में मृत्यु का एक बड़ा कारण बन चुकी हैं। अधिकांश मामलों में यह सामने आया है कि लोग यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं, जिसका परिणाम जानलेवा साबित होता है।
उन्होंने हाल ही में जिले में हुई दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मौतें केवल इसलिए हुईं क्योंकि दोपहिया वाहन चालकों ने हेलमेट नहीं पहना था।
हेलमेट औपचारिकता नहीं, जीवन रक्षक कवच
डा. वशिष्ठ ने कहा कि हेलमेट को लोग अक्सर बोझ या चालान से बचने का साधन मानते हैं, जबकि यह जीवन रक्षक सुरक्षा कवच है। विशेषज्ञों के अनुसार, हेलमेट पहनने से सिर में गंभीर चोट लगने की आशंका लगभग 70 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि छोटी दूरी के लिए भी बिना हेलमेट वाहन न चलाएं और हेलमेट पहनना अपनी आदत बनाएं।
प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
उपायुक्त ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सरकार और जिला प्रशासन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने सड़क सुरक्षा समिति को निर्देश दिए कि कोहरे और मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आमजन और वाहन चालकों के लिए यात्रा को सुरक्षित, सुगम और आरामदायक बनाया जाए।
एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश
डा. वशिष्ठ ने साफ किया कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यदि कोई सड़क दुर्घटना होती है, तो संबंधित विभाग को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सड़क पर गड्ढों, खराब डिजाइन या एजेंसी की गलती के कारण दुर्घटना होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।
ब्लैक स्पॉट और अवसंरचना सुधार पर फोकस
बैठक में पीपीटी के माध्यम से जिले में होने वाली दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि जहां अधिक दुर्घटनाएं होती हैं, वहां विशेष ध्यान देकर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने स्पीड ब्रेकर निर्माण, अवैध कट बंद करने, सड़क पर पीली पट्टी, संकेत बोर्ड, रोड मार्किंग, रेलिंग लगाने और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
अवैध अतिक्रमण और ढाबों पर कार्रवाई
उपायुक्त ने सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण, अवैध होटल और ढाबों को हटाने के निर्देश भी दिए। उनका कहना था कि सड़क किनारे अव्यवस्था और गलत पार्किंग भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती है।
होडल, औरंगाबाद और बघोला फ्लाईओवर पर जंप की समस्या को दूर करने के लिए संबंधित एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए गए।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्ती
डा. वशिष्ठ ने हेलमेट न पहनने वालों के अधिक से अधिक चालान करने और गंभीर मामलों में तीन माह तक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही रेड लाइट उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरटेकिंग, एक्सप्रेस-वे पर बाइक चलाना, तेज रोशनी और बीम एलईडी लाइट, हूटर और ब्लू लाइट के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए।
गलत ड्राइविंग और अवैध कट पर एफआईआर
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि अवैध कट खोलने और गलत दिशा में वाहन चलाने पर धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गलत तरीके से ड्राइविंग सिखाने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और सड़कों पर रिफलेक्टिव टेप अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे।
स्कूल वाहनों की सुरक्षा पर विशेष जोर
बैठक में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि केवल सरकार द्वारा तय मानकों को पूरा करने वाले वाहनों का ही संचालन किया जाए। ड्राइवरों का नियमित मेडिकल परीक्षण और वाहनों की फिटनेस अनिवार्य रूप से अपडेट रखी जाए।
शिक्षा विभाग को जागरूकता के निर्देश
डा. वशिष्ठ ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों और सुरक्षित वाहन नीति के प्रति जागरूक किया जाए।
उनका कहना था कि बचपन से ही यदि यातायात नियमों की समझ विकसित की जाए, तो भविष्य में दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
आईआईटी मद्रास ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई
उपायुक्त ने आईआईटी मद्रास द्वारा की गई सड़क सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि रिपोर्ट के सुझावों पर तुरंत अमल किया जाए और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।