साइबर थाना NIT की टीम ने 33.55 लाख रुपये की ठगी मामले में खाताधारक को गिरफ्तार किया।
साइबर थाना NIT की बड़ी कार्रवाई, बुजुर्ग को बनाया गया था निशाना
फरीदाबाद में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस को एक अहम सफलता मिली है। साइबर थाना NIT की टीम ने 33,55,088 रुपये की साइबर ठगी के मामले में खाताधारक को गिरफ्तार किया है। यह ठगी एक बुजुर्ग व्यक्ति से की गई थी, जिसे फोन कॉल के जरिए डराकर और सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर जाल में फंसाया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान हेमनंदा मलिक (22) निवासी जिला बलांगिर, ओडिशा के रूप में हुई है। आरोपी के बैंक खाते में ठगी की रकम में से करीब 10 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस साइबर गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल
साइबर थाना NIT में दी गई शिकायत के अनुसार, फरीदाबाद के सेक्टर-22 में रहने वाले बुजुर्ग व्यक्ति को 9 जनवरी को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के मोबाइल की सेवाएं अगले दो घंटे में बंद कर दी जाएंगी। जब पीड़ित ने इसका कारण पूछा, तो उसे बताया गया कि मुंबई के तिलक नगर पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं।
ठग ने बातचीत को और डरावना बनाते हुए कहा कि वह एक कमरे में बैठा है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) शिकायतकर्ता के बैंक लेनदेन की जांच करना चाहता है। इसके बाद पीड़ित को निर्देश दिया गया कि वह फोन पर बताए गए हर निर्देश का पालन करे।
पहले से थी बैंक जानकारी
जांच में यह बात सामने आई है कि ठगों के पास पीड़ित की बैंक से जुड़ी कई जानकारियां पहले से मौजूद थीं। कॉल करने वाले ने पीड़ित से उसके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की जानकारी पूछी। पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि यह प्रक्रिया उसकी “जांच” के लिए जरूरी है।
इसी विश्वास और डर के माहौल में पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में अपने खातों से रकम ट्रांसफर कर दी। इस तरह कुल 33,55,088 रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।
साइबर थाना NIT में दर्ज हुआ मामला
घटना के बाद पीड़ित ने साइबर थाना NIT में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। जांच के दौरान जिन खातों में ठगी की रकम पहुंची थी, उनकी पहचान की गई।
इसी क्रम में ओडिशा के बलांगिर जिले में स्थित एक बैंक खाते में करीब 10 लाख रुपये आने की पुष्टि हुई। पुलिस ने खाते के मालिक हेमनंदा मलिक को पूछताछ के लिए बुलाया और सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी खाताधारक की भूमिका
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि हेमनंदा मलिक केवल खाताधारक है, जिसके खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया। आरोपी 10वीं पास है और कम उम्र में ही साइबर अपराधियों के नेटवर्क से जुड़ गया था।
हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को इस ठगी की पूरी जानकारी थी या वह कमीशन के लालच में अपना खाता इस्तेमाल करने दे रहा था। ऐसे मामलों में खाताधारकों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि बिना बैंक खातों के साइबर ठगी संभव नहीं हो पाती।
न्यायालय में पेश, भेजा गया जेल
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों, कॉल करने वालों और तकनीकी सहायता देने वालों की तलाश में जुटी है।
साइबर थाना NIT की टीम का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी संभव है।
फरीदाबाद पुलिस की लगातार कार्रवाई
फरीदाबाद पुलिस पिछले कुछ समय से साइबर अपराध के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है। बुजुर्गों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर की जा रही ठगी को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
पुलिस बार-बार लोगों से अपील कर रही है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर बैंक डिटेल या ओटीपी नहीं मांगती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।