डीटीपी सोनीपत की टीम ने खांड़ा बाईपास और गोपालपुर अंडरपास क्षेत्र में बनी अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया।
खांड़ा बाईपास और गोपालपुर अंडरपास क्षेत्र में चला बुलडोजर
सोनीपत जिले में अवैध कॉलोनियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त सुशील सारवान के निर्देशों पर जिला नगर योजनाकार (DTP) विभाग ने अवैध निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को खांड़ा बाईपास और गोपालपुर अंडरपास क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया गया।
जिला नगर योजनाकार अजमेर सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई अवैध कॉलोनियों को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि भविष्य में आम नागरिकों को आर्थिक और कानूनी नुकसान से बचाया जा सके।
कहां-कहां हुई कार्रवाई
डीटीपी सोनीपत की इंफोर्समेंट टीम ने गांव खरखौदा की राजस्व सीमा में स्थित दो प्रमुख स्थानों पर कार्रवाई की। पहली कार्रवाई खांड़ा बाईपास पर रोहतक रोड से सटे क्षेत्र में की गई, जहां लगभग 6 एकड़ भूमि पर अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी। दूसरी कार्रवाई सोनीपत-झज्जर रोड पर गोपालपुर अंडरपास के पास की गई, जहां करीब 3 एकड़ क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का काम चल रहा था।
इन दोनों स्थानों पर टीम ने कुल 10 डीपीसी (डैम्प प्रूफ कोर्स) और कच्चे सड़क नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, जिससे अवैध कॉलोनी विकसित करने की कोशिश को मौके पर ही रोक दिया गया।
प्रारंभिक चरण में तोड़फोड़ की रणनीति
डीटीपी अजमेर सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की मंशा यह है कि अवैध कॉलोनियों को विकसित होने से पहले ही खत्म कर दिया जाए। यदि निर्माण कार्य आगे बढ़ने दिया गया, तो बाद में वहां रहने वाले लोगों को बेदखली, सुविधाओं की कमी और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ता है।
इसी कारण विभाग ने निगरानी तंत्र को मजबूत किया है और जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित सर्वे किए जा रहे हैं, ताकि अवैध गतिविधियों की पहचान समय रहते हो सके।
अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर FIR की चेतावनी
जिला नगर योजनाकार ने दो टूक शब्दों में कहा कि सोनीपत जिले में किसी भी प्रकार की अवैध कॉलोनी को मंजूरी नहीं दी गई है। यदि कोई व्यक्ति या समूह बिना स्वीकृति के कॉलोनी विकसित करता पाया गया, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि केवल निर्माण ध्वस्त करना ही नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में जमीन मालिक, डेवलपर और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अवैध कॉलोनियां क्यों बनती हैं खतरा
अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदना आम नागरिकों के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। ऐसी कॉलोनियों में सरकार द्वारा कोई भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती। सड़क, पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और बिजली जैसी सुविधाएं यहां अक्सर नहीं होतीं।
इसके अलावा, भविष्य में जब प्रशासन कार्रवाई करता है, तो वहां बसे लोगों को आर्थिक नुकसान और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में प्लॉट रजिस्ट्री, बिजली कनेक्शन और पानी के कनेक्शन भी नहीं मिल पाते।
आमजन से प्रशासन की अपील
डीटीपी अजमेर सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले उसकी वैधता अवश्य जांचें। केवल वही कॉलोनियां सुरक्षित मानी जाएंगी, जिन्हें सक्षम प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृति प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि लोग लालच में आकर सस्ते प्लॉट न खरीदें, क्योंकि यह भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। किसी भी कॉलोनी की स्थिति जानने के लिए जिला नगर योजनाकार कार्यालय, प्रथम तल, एचएसवीपी कॉम्प्लेक्स, सेक्टर-15, सोनीपत में संपर्क किया जा सकता है।
शहर नियोजन और विकास का मुद्दा
सोनीपत जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में नियोजित विकास एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अवैध कॉलोनियां न केवल शहर की मूलभूत संरचना पर दबाव डालती हैं, बल्कि ट्रैफिक, जल निकासी और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी गंभीर बना देती हैं।
प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती न बरती जाए, तो भविष्य में शहर की योजना पूरी तरह बिगड़ सकती है।