डीसी सुशील सारवान द्वारा प्रोजेक्ट अक्षर की शुरुआत
सोनीपत जिले में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। निपुण हरियाणा मिशन के अंतर्गत जिला प्रशासन ने “प्रोजेक्ट अक्षर” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चे को आधारभूत साक्षरता और गणन क्षमता (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी – FLN) में दक्ष बनाना है। उपायुक्त सुशील सारवान ने गोहाना के राजकीय प्राइमरी स्कूल बनवासा से इस विशेष अभियान का शुभारंभ किया।
यह परियोजना न केवल शिक्षण पद्धतियों में सुधार पर केंद्रित है, बल्कि यह सीखने के स्तर को मापने, कमियों की पहचान करने और लक्षित शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने का एक संगठित मॉडल भी प्रस्तुत करती है। जिला प्रशासन का मानना है कि मजबूत आधारभूत शिक्षा ही भविष्य की शैक्षणिक सफलता की कुंजी है।
निपुण हरियाणा मिशन की पृष्ठभूमि
निपुण हरियाणा मिशन की शुरुआत 31 जुलाई 2021 को केंद्र सरकार के निपुण भारत मिशन के अनुरूप की गई थी, जिसे 5 जुलाई 2021 को लागू किया गया। इस मिशन का मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा प्राथमिक शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों में पढ़ने, लिखने और गणना करने की बुनियादी क्षमताएं हासिल कर सके।
शुरुआत में यह मिशन कक्षा 1 से 3 तक सीमित था, लेकिन शैक्षणिक सत्र 2024–25 से इसका विस्तार कक्षा 4 और 5 तक कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चे केवल कक्षा उत्तीर्ण न करें, बल्कि सीखने के निर्धारित स्तर तक वास्तव में पहुंचें।
कथूरा ब्लॉक को पहला पूर्ण निपुण ब्लॉक बनाने का लक्ष्य
प्रोजेक्ट अक्षर के लिए सोनीपत जिले के कथूरा ब्लॉक का चयन पायलट परियोजना के रूप में किया गया है। इस ब्लॉक के सभी 24 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को परियोजना में शामिल किया गया है। लक्ष्य यह रखा गया है कि कक्षा 2 के कम से कम 75 प्रतिशत विद्यार्थी आधारभूत साक्षरता और गणन क्षमता में दक्ष हो जाएं।
जिला प्रशासन का उद्देश्य कथूरा ब्लॉक को हरियाणा का पहला “पूर्ण निपुण ब्लॉक” बनाना है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे भविष्य में जिले के अन्य ब्लॉकों और राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
डेटा आधारित शिक्षा सुधार की दिशा में कदम
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि सोनीपत जिला पहले ही निपुण हरियाणा मिशन के तहत उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। हाल ही में कक्षा 2 और 3 के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन करने के लिए राज्यभर में दो चरणों में सेंसस ग्रुपिंग अभ्यास किया गया।
इन आकलनों के अनुसार, सोनीपत में कैटेगरी A स्कूलों की संख्या, जहां 75 प्रतिशत या उससे अधिक विद्यार्थी निपुण स्तर पर हैं, सेंसस 1.0 में 4 प्रतिशत से बढ़कर सेंसस 2.0 में 57 प्रतिशत हो गई। वहीं, कैटेगरी C स्कूलों की संख्या, जहां 50 प्रतिशत या उससे कम विद्यार्थी निपुण हैं, 75 प्रतिशत से घटकर 14 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़े जिले में शिक्षा सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत देते हैं।
मासिक मूल्यांकन और लक्षित शिक्षण सहयोग
प्रोजेक्ट अक्षर के अंतर्गत कक्षा 2 के सभी विद्यार्थियों का प्रत्येक माह हिंदी और गणित विषयों में स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए मोबाइल आधारित मानकीकृत टूल्स का उपयोग किया जाएगा, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बनी रहे।
मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों की सीखने संबंधी कमियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उन्हें लक्षित वर्कशीट्स, अभ्यास सामग्री और शिक्षक सहायता पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आकलन केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि कक्षा शिक्षण में वास्तविक सुधार का माध्यम बने।
निष्पक्षता के लिए स्वतंत्र आकलनकर्ता
मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए 13 विधि विद्यार्थियों को स्वतंत्र आकलनकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया है। प्रत्येक आकलनकर्ता को एक या एक से अधिक विद्यालयों की जिम्मेदारी दी गई है।
इन आकलनकर्ताओं को पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि मूल्यांकन एक समान मानकों पर आधारित हो और किसी प्रकार का पक्षपात न हो।
निगरानी के लिए विशेष पर्यवेक्षक
परियोजना के क्रियान्वयन और गुणवत्ता मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए 24 अधिकारियों को विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। इनमें खंड शिक्षा अधिकारी और सीआरसी हेड शामिल हैं। ये अधिकारी मूल्यांकन के दिनों में विद्यालयों का दौरा कर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
उपायुक्त सुशील सारवान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं चयनित विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रोजेक्ट अक्षर अपने निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
चरणबद्ध मूल्यांकन से तय होगी आगे की रणनीति
प्रोजेक्ट अक्षर का पहला चरण 2 और 3 फरवरी 2026 को सभी 24 विद्यालयों में आयोजित किया जा रहा है। इसके बाद एक माह तक लक्षित शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। मार्च और अप्रैल में अगले चरणों के मूल्यांकन होंगे, जिनके आधार पर परियोजना की प्रगति का आकलन कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।