थाना छायंसा पुलिस द्वारा पोक्सो केस में आरोपी की गिरफ्तारी
न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश पर पुलिस की सख्त कार्रवाई
फरीदाबाद में पोक्सो एक्ट से जुड़े एक गंभीर मामले में कानून से बचने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। थाना छायंसा की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी मोहित को काबू किया है, जिसने अपनी अग्रिम जमानत हासिल करने के उद्देश्य से पीड़िता की उम्र को लेकर जाली दस्तावेज तैयार करवाए थे। यह मामला न केवल यौन अपराधों से जुड़ा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास का भी गंभीर उदाहरण है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी मोहित गांव प्रहलादपुर, फरीदाबाद का रहने वाला है और उसके खिलाफ पहले से ही पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज था। मामले के सामने आने के बाद से वह फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने गलत तरीके अपनाए।
क्या है पूरा मामला
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने थाना छायंसा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि अगस्त 2025 में उसकी नाबालिग बेटी से जुड़े एक पोक्सो एक्ट के मामले में आरोपी मोहित के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी ने कानून का सामना करने के बजाय फरारी का रास्ता अपनाया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने माननीय अदालत से अग्रिम जमानत पाने के लिए पीड़िता की उम्र को बालिग दर्शाने की साजिश रची। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहना से पीड़िता का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए, ताकि अदालत को गुमराह किया जा सके।
जांच में कैसे खुली साजिश
शिकायत के आधार पर थाना छायंसा में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने दस्तावेजों की जांच की तो कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच में स्पष्ट हुआ कि जिन दस्तावेजों के आधार पर पीड़िता को बालिग दिखाया गया, वे वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने भाई और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया था। उद्देश्य सिर्फ एक था—पोक्सो एक्ट जैसे गंभीर कानून के तहत गिरफ्तारी से बचना और अग्रिम जमानत हासिल करना।
पहले से दर्ज था पोक्सो एक्ट का मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी मोहित के खिलाफ अगस्त 2025 में थाना सदर बल्लभगढ़ में पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। मामला दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गया और लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
फरारी के दौरान उसने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की, जो अपने आप में एक गंभीर अपराध है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की हरकतें न केवल पीड़ित पक्ष को मानसिक रूप से परेशान करती हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
पुलिस की भूमिका और संदेश
थाना छायंसा की टीम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान सुनिश्चित की और उसे गिरफ्तार किया। आरोपी को माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
फरीदाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पोक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई आरोपी कानून से बचने के लिए गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पोक्सो एक्ट और दस्तावेजी फर्जीवाड़ा
पोक्सो एक्ट का उद्देश्य नाबालिग बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है। इस कानून में पीड़िता की उम्र सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर करना न केवल अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश है, बल्कि पीड़िता के अधिकारों पर भी सीधा हमला है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालतें ऐसे मामलों में दस्तावेजी फर्जीवाड़े को बेहद गंभीरता से लेती हैं और दोषी पाए जाने पर अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।