लघु सचिवालय पलवल परिसर में सफाई और मरम्मत कार्यों का जायजा लेते उपायुक्त
पलवल, जिला प्रशासन ने सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और सुव्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार प्रातः लघु सचिवालय पलवल परिसर का औचक निरीक्षण किया। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्वयं मौके पर पहुंचकर परिसर में चल रहे मेंटेनेंस, मरम्मत और साफ-सफाई कार्यों का गहन निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वच्छता में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि लघु सचिवालय आम नागरिकों के लिए प्रशासन से सीधे जुड़ने का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं और आवश्यक कार्यों को लेकर आते हैं। ऐसे में परिसर का स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित होना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि सुशासन की बुनियादी शर्त भी है।
मरम्मत कार्यों के बाद तुरंत हटे मलबा
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिए कि रंग-रोगन, मरम्मत और रखरखाव कार्यों में उपयोग की गई सामग्री, मलबा और अन्य अपशिष्ट को कार्य पूर्ण होते ही तत्काल हटवाया जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मलबा या निर्माण सामग्री पड़ी रहने से न केवल अव्यवस्था फैलती है, बल्कि आवागमन में भी बाधा उत्पन्न होती है, जिससे आम नागरिकों को परेशानी होती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ कार्यस्थल की साफ-सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी स्थान पर अव्यवस्था या गंदगी पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी और एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
परिसर में नियमित सफाई के निर्देश
उपायुक्त ने परिसर के चारों ओर नियमित रूप से सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कोने में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक या अन्य गंदगी दिखाई नहीं देनी चाहिए। इसके लिए सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ वातावरण न केवल नागरिकों को सकारात्मक अनुभव देता है, बल्कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मनोबल पर भी अच्छा प्रभाव डालता है। स्वच्छ कार्यालय में काम करने से अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना स्वतः विकसित होती है।
कार्यालयों, रिकॉर्ड रूम और शौचालयों पर फोकस
उपायुक्त ने सभी विभागों के अधिकारियों को अपने-अपने कार्यालय परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने रिकॉर्ड कक्ष, गलियारों, शौचालयों और प्रतीक्षालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर निरीक्षण के दौरान यह देखने में आता है कि रिकॉर्ड रूम और गलियारों में धूल, अव्यवस्थित फाइलें और अनुपयोगी सामान जमा रहता है, जो न केवल अस्वच्छता का कारण बनता है बल्कि कार्य में भी बाधा डालता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि पुराने और अनुपयोगी सामान की पहचान कर नियमानुसार उसका निस्तारण किया जाए, ताकि कार्यालयों में पर्याप्त स्थान और व्यवस्था बनी रहे।
औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता और व्यवस्थाओं की जांच के लिए समय-समय पर औचक निरीक्षण किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है। हालांकि, यदि बार-बार निर्देशों की अनदेखी की गई, तो आवश्यक कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटा जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता और बेहतर व्यवस्थाएं किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं हैं। इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। जब तक हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक स्थायी सुधार संभव नहीं है।
सुशासन की पहचान है स्वच्छ कार्यालय
उपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता और सुव्यवस्थित कार्यालय सुशासन की पहचान होते हैं। नागरिक जब किसी सरकारी कार्यालय में आते हैं, तो वहीं से उनके मन में प्रशासन की छवि बनती है। यदि परिसर साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सहयोगी वातावरण वाला होगा, तो जनता का भरोसा प्रशासन पर और मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की विभिन्न स्वच्छता पहल तभी सफल हो सकती हैं, जब सरकारी कार्यालय स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें। लघु सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्रों में उच्च मानकों की स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
अधिकारियों की मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान एसडीएम ज्योति, लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता रितेश यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने और नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।