राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित जागरूकता शिविर और शपथ ग्रहण कार्यक्रम
सोनीपत जिले में सामाजिक सुधार और विधिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान और पर्यावरणीय विधिक साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाना और साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर नागरिक जिम्मेदारियों को रेखांकित करना रहा।
यह जागरूकता शिविर और शपथ ग्रहण कार्यक्रम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, तिहाड़ बागड़ू में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, सोनीपत के तत्वावधान में किया गया, जो समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के लिए कार्यरत है।
न्यायिक नेतृत्व में हुआ कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, सोनीपत श्री जगजीत सिंह के निर्देशानुसार किया गया। वहीं, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण श्री प्रचेता सिंह के मार्गदर्शन में इस पहल को जमीन पर उतारा गया।
जागरूकता शिविर का संचालन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता सुश्री रीता धनखड़ द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को सरल भाषा में बाल विवाह से जुड़े कानूनी पहलुओं और इसके सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।
बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। कम उम्र में विवाह के कारण शिक्षा छूट जाती है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं और विशेष रूप से बालिकाओं को जीवनभर इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
सुश्री रीता धनखड़ ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि कानून के अनुसार 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष और 18 वर्ष से कम आयु की महिला का विवाह अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में न केवल विवाह कराने वालों, बल्कि इसमें सहयोग करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
पर्यावरणीय विधिक साक्षरता पर भी दिया गया जोर
बाल विवाह के साथ-साथ कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया। “आज सुरक्षा करें, कल सुरक्षित रहें” विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण के महत्व और नागरिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के सीमित उपयोग और स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कदम समाज और भविष्य के लिए बड़े बदलाव ला सकते हैं।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने ली शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को बाल विवाह न करने और न होने देने की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही सभी ने पर्यावरण की रक्षा करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प भी लिया।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को कम उम्र में ही कानून और समाज की समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी भी दी गई
जागरूकता शिविर के दौरान सुश्री रीता धनखड़ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, सोनीपत द्वारा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को नि:शुल्क पैनल अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं।
इसके अलावा जिन व्यक्तियों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है, वे भी अपने मामलों में नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कमजोरी किसी को न्याय से वंचित न करे।
कानूनी परामर्श के लिए संपर्क जानकारी
विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह भी बताया गया कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, सोनीपत का कार्यालय एडीआर सेंटर, जिला न्यायालय परिसर, सोनीपत में स्थित है। यहां प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक नि:शुल्क कानूनी परामर्श दिया जाता है।
जो लोग कार्यालय आने में असमर्थ हैं, वे हेल्पलाइन नंबर 0130-2220057 या नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर कानूनी सलाह और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस जानकारी का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।
समाज में जागरूकता की दिशा में अहम कदम
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
यह पहल यह भी दर्शाती है कि यदि बच्चों को सही समय पर सही जानकारी दी जाए, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकते हैं।