राजधानी दिल्ली में लापता मामलों को लेकर कांग्रेस का पत्र
दिल्ली में लापता हो रहे बच्चों पर बढ़ती चिंता
देश की राजधानी दिल्ली में छोटे बच्चों, विशेषकर लड़कियों के लापता होने की घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर गहन जांच और विशेष टास्क फोर्स के गठन की मांग की है। उनका कहना है कि राजधानी में लगातार सामने आ रहे लापता मामलों को अब सामान्य अपराध मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उपराज्यपाल को लिखा गया पत्र
श्री देवेन्द्र यादव ने अपने पत्र में बताया कि वर्ष 2026 के पहले महीने के केवल 27 दिनों में ही दिल्ली से 807 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे, छोटी लड़कियां और महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील और चिंताजनक स्थिति बताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों का गायब होना राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
प्रतिदिन औसतन 27 लोग लापता
कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, दिल्ली में औसतन प्रतिदिन 27 लोग लापता हो रहे हैं, इसके बावजूद न तो दिल्ली सरकार और न ही केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी की कानून व्यवस्था पर जिम्मेदार संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय की भूमिका
श्री देवेन्द्र यादव ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है। ऐसे में पुलिस की निगरानी में ही यदि लड़कियां और महिलाएं बड़ी संख्या में लापता हो रही हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी समय-समय पर दिल्ली की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर गृह मंत्रालय, उपराज्यपाल और पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित करती रही है, लेकिन जमीनी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।
राजधानी में बढ़ते अन्य अपराध
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में केवल लापता होने के मामले ही नहीं, बल्कि हत्या, बलात्कार, धमकी, गोलीबारी, चेन स्नैचिंग और लूटपाट जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। दिनदहाड़े हो रहे अपराध यह संकेत देते हैं कि अपराधियों में कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है और आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
2025 के अपराध आंकड़े क्या कहते हैं
श्री देवेन्द्र यादव ने पिछले वर्ष 2025 के अपराध आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली में 25 हत्याएं हुईं और 491 हत्या के प्रयास के मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा बलात्कार के 1901 मामले, महिलाओं के खिलाफ 1708 अपराध, छेड़छाड़ के 337 मामले, लूटपाट के 1326 मामले और जबरन वसूली के 212 मामले सामने आए। उनके अनुसार, ये आंकड़े राजधानी की कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं।
महिला मुख्यमंत्री के बावजूद असुरक्षा
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिल्ली में एक महिला मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार होने के बावजूद महिलाओं, बच्चियों और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस आम लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रही है, जिससे खासकर गरीब परिवारों की लड़कियां और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर सवाल
श्री देवेन्द्र यादव ने केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि देश की राजधानी में ही लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, तो पूरे देश में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कैसे निभाई जा सकती है। उनका कहना था कि जब बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी, तो शिक्षा की बात केवल नारा बनकर रह जाएगी।
टास्क फोर्स गठन की मांग
कांग्रेस नेता ने जोर देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में केवल सामान्य पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लापता मामलों की जांच, अपराध नेटवर्क की पहचान और त्वरित कार्रवाई के लिए एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की मांग की। उनका मानना है कि मजबूत और समर्पित जांच तंत्र के बिना इन अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
आम जनता में डर का माहौल
दिल्ली में बढ़ते अपराधों के चलते आम लोग अपने और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। स्कूल जाने वाली बच्चियों से लेकर कामकाजी महिलाओं तक, हर वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ी हुई है।