हरियाणा सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा पहल बनकर उभरी है। इस योजना का उद्देश्य बेटियों, दिव्यांगजनों और बेसहारा महिलाओं के विवाह में आर्थिक सहयोग प्रदान कर सामाजिक समानता और सम्मान को बढ़ावा देना है। सोनीपत के उपायुक्त सुशील सारवान ने इस योजना को कमजोर वर्गों के लिए “एक सशक्त प्रयास” बताते हुए पात्र परिवारों से इसका लाभ उठाने की अपील की है।
योजना का उद्देश्य और सामाजिक महत्व
मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच में बदलाव लाने की दिशा में भी एक प्रभावी माध्यम है। विवाह के समय आने वाला आर्थिक बोझ कई गरीब परिवारों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ऐसे में यह योजना बेटियों के विवाह को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है। सरकार का मानना है कि जब आर्थिक बाधाएं कम होंगी, तो बेटियों को बोझ नहीं बल्कि सम्मान के रूप में देखा जाएगा।
किन वर्गों को मिलता है लाभ
उपायुक्त सुशील सारवान ने जानकारी दी कि योजना के तहत विभिन्न सामाजिक वर्गों के लिए अलग-अलग अनुदान राशि निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति और टपरीवास जाति के ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है, उनकी बेटियों के विवाह पर 71,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। वहीं पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग के पात्र परिवारों को 41,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है।
बेसहारा और विशेष परिस्थितियों वाली महिलाओं के लिए सहायता
इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल पारंपरिक पारिवारिक ढांचे तक सीमित नहीं है। विधवा, अनाथ, तलाकशुदा और बेसहारा महिलाओं तथा उनके बच्चों की बेटियों के विवाह के लिए 51,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इससे उन महिलाओं को भी सामाजिक सुरक्षा मिलती है जो कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही हैं।
दिव्यांगजनों और महिला खिलाड़ियों के लिए प्रावधान
मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना में दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि विवाह में दोनों वर-वधू दिव्यांग हैं, तो उन्हें 51,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है। यदि केवल एक पक्ष दिव्यांग है, तो 41,000 रुपये की सहायता मिलती है। इसके अलावा, महिला खिलाड़ियों जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है, उनके विवाह पर भी 41,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह पहल सरकार की समावेशी सोच को दर्शाती है।
आवेदन प्रक्रिया और जरूरी शर्तें
उपायुक्त ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए विवाह के बाद छह माह के भीतर विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि पात्र परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इच्छुक आवेदक shadi.edisha.gov.in पोर्टल के माध्यम से विवाह पंजीकरण और योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचे।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
जिला प्रशासन इस योजना के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उपायुक्त सुशील सारवान के अनुसार, प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार जानकारी के अभाव में योजना से वंचित न रहे। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रमों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है।