सोनीपत जिले में अवैध कॉलोनी के निर्माण को ध्वस्त करती प्रशासनिक टीम
अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख पर जिला प्रशासन
सोनीपत जिले में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उपायुक्त सुशील सारवान के निर्देशानुसार जिला नगर योजनाकार विभाग द्वारा गुरुवार को गोहाना और नगर गांव की राजस्व संपदा में 13.5 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से किए जा रहे कई निर्माणों को प्रारंभिक चरण में ही गिरा दिया गया, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमित बसावट को रोका जा सके। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) अजमेर सिंह ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
कौन-कौन से निर्माण किए गए ध्वस्त
डीटीपी अजमेर सिंह के अनुसार, जिस अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई की गई, वहां बुनियादी ढांचे का निर्माण तेजी से किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम ने एक निर्माणाधीन मकान, 25 डीपीसी, दो बाउंड्री वॉल, सीवरेज प्रणाली और कच्चे एवं पक्के रास्तों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह क्षेत्र अवैध आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित हो सकता था, जिससे भविष्य में सरकार और आमजन दोनों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता।
क्यों खतरनाक हैं अवैध कॉलोनियां
जिला नगर योजनाकार ने आम नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदना न केवल आर्थिक जोखिम है, बल्कि कानूनी परेशानी का कारण भी बन सकता है। ऐसी कॉलोनियों में सरकार द्वारा सड़क, पानी, सीवरेज, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं।
अक्सर देखा गया है कि लोग कम कीमत के लालच में बिना जांच-पड़ताल किए प्लॉट खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें न तो सुविधाएं मिलती हैं और न ही वैध दस्तावेज। कई मामलों में ऐसे निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाता है, जिससे खरीदारों की मेहनत की कमाई पूरी तरह डूब जाती है।
प्लॉट खरीदने से पहले क्या सावधानी बरतें
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में निवेश करने से पहले यह अवश्य जांच लें कि वह कॉलोनी नगर योजनाकार विभाग से स्वीकृत है या नहीं। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच, लाइसेंस नंबर और लेआउट प्लान की पुष्टि करना आवश्यक है।
जिला नगर योजनाकार कार्यालय, सोनीपत में जाकर या विभाग की आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से कॉलोनी की वैधता की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जागरूकता ही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों पर FIR
डीटीपी अजमेर सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिले में किसी भी अवैध कॉलोनी के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या समूह अवैध कॉलोनी विकसित करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नियमित निगरानी की जा रही है। सैटेलाइट इमेजरी, फील्ड निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन की कार्रवाई का व्यापक उद्देश्य
यह अभियान केवल निर्माण गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुव्यवस्थित शहरी विकास सुनिश्चित करना है। अनियोजित विकास से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि भविष्य में यातायात, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं पर भी भारी दबाव पड़ता है।
प्रशासन का मानना है कि यदि अवैध कॉलोनियों को प्रारंभिक चरण में ही रोका जाए, तो शहर और गांवों का विकास योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है, जिससे नागरिकों को बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें।