साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम द्वारा फर्जी कॉल सेंटर ठगी गिरोह के पांच आरोपियों की गिरफ्तारी
फरीदाबाद में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है। साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने निवेश के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को झूठे मुनाफे का सपना दिखाकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए थे और दिल्ली-एनसीआर से अपना नेटवर्क चला रहे थे।
निवेश के नाम पर कैसे फंसाया गया पीड़ित
पुलिस के अनुसार, भगत कॉलोनी, बल्लभगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता को पहले “Veda Quant Council” और “VIP668” नामक व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया। इन ग्रुपों में शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश से जुड़े संदेश भेजे जाते थे, जिनमें कम समय में अधिक लाभ का दावा किया जाता था।
ग्रुप से जुड़े लोगों ने पीड़ित को भरोसे में लेकर “Vent Sec Pro” नामक एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। एप पर निवेश करने के बाद पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 3,79,450 रुपये जमा कर दिए। एप में उसके खाते में लाभ दिखाकर लगभग 11 लाख रुपये की राशि दर्शाई गई, जिससे उसका भरोसा और मजबूत हो गया।
निकासी के समय सामने आई सच्चाई
जब पीड़ित ने एप से अपनी राशि निकालने का प्रयास किया, तो उसे तकनीकी कारणों और अतिरिक्त शुल्क का हवाला देकर टाल दिया गया। बार-बार प्रयास के बावजूद जब पैसे नहीं निकले, तब उसे एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हुई है। इसके बाद उसने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
साइबर थाना बल्लभगढ़ की सुनियोजित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना बल्लभगढ़ की एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस ने गिरोह तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए संचालित किया जा रहा था, जहां से लोगों को फोन कर निवेश के लिए फंसाया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रताप गुप्ता, सतेन्द्र कुमार, जितेन्द्र बलुनी, राज गुप्ता और मनोरंजन बराल उर्फ हैप्पी शामिल हैं। ये सभी आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के रहने वाले हैं, लेकिन दिल्ली और गाजियाबाद में रहकर ठगी की गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
गिरोह का काम करने का तरीका
पूछताछ में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी मिलकर दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक फ्लैट किराये पर लेकर फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। कॉल सेंटर से निवेश से जुड़े कॉल किए जाते थे और लोगों को ज्यादा रिटर्न का लालच दिया जाता था।
इस पूरे नेटवर्क में हर आरोपी की अलग भूमिका थी। कुछ आरोपी कॉलिंग कर निवेशकों को फंसाते थे, जबकि एक आरोपी ने फर्जी निवेश एप तैयार करवाई थी। बैंक खातों की व्यवस्था भी गिरोह के ही एक सदस्य द्वारा की जाती थी, ताकि ठगी की रकम अलग-अलग खातों में प्राप्त की जा सके और पहचान छिपाई जा सके।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल फरीदाबाद तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बना रहा था। व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप के जरिए यह गिरोह बड़ी संख्या में निवेशकों को जोड़ने की कोशिश करता था। पुलिस को आशंका है कि आगे की जांच में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
साइबर अपराध पर पुलिस की चेतावनी
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन निवेश के मामलों में सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप, कॉल या एप के माध्यम से निवेश करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। अधिक मुनाफे के लालच में आकर बिना सत्यापन के पैसा निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।