एसएमडीए टीम द्वारा अवैध कॉलोनियों पर की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई
सोनीपत में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त अभियान
सोनीपत जिले में अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त सुशील सारवान के निर्देशानुसार सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) द्वारा अवैध विकास गतिविधियों को शुरुआती चरण में ही रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को एसएमडीए की टीम ने गांव नाहरा, नाहरी और डिहकी की राजस्व भूमि पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया।
जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) नीलम शर्मा ने बताया कि नियंत्रित क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर कॉलोनियां विकसित की जा रही थीं, जिससे न केवल शहरी नियोजन प्रभावित हो रहा था, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और निवेश भी जोखिम में पड़ रहा था।
डिहकी और नाहरी में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान गांव डिहकी में करीब 3.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई की गई। यहां तीन बाउंड्री वॉल, कच्चे रास्ते और बिछाए गए सीवरेज पाइपों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
इसी तरह गांव नाहरी में 3.5 एकड़ में फैली अवैध कॉलोनी में 50 डीपीसी, 10 बाउंड्री वॉल, एक निर्माणाधीन मकान, 10 बिजली खंभे और लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में इंटरलोकिंग टाइल से बने सड़क नेटवर्क को तोड़ा गया। इसके अतिरिक्त नाहरी गांव में ही 1.75 एकड़ में फैली एक अन्य अवैध कॉलोनी में 25 डीपीसी, 5 बाउंड्री वॉल और 10 बिजली खंभों को हटाया गया।
गांव नाहरा में अवैध शेड भी ध्वस्त
अभियान के तहत गांव नाहरा में एक अवैध रूप से निर्मित शेड को भी गिराया गया। अधिकारियों के अनुसार यह निर्माण बिना किसी स्वीकृति के किया गया था और नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम का उल्लंघन करता था। एसएमडीए ने स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्माणों को भविष्य में भी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
डीटीपी नीलम शर्मा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि लोग अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से बचें। ऐसी कॉलोनियों में सरकार द्वारा सड़क, पानी, सीवरेज, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, जिससे भविष्य में भारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि प्लॉट या मकान खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संबंधित कॉलोनी विधिवत स्वीकृत है या नहीं। यदि नागरिक बिना जांच-पड़ताल के निवेश करते हैं तो उनकी मेहनत की कमाई खतरे में पड़ सकती है।
अनुमति के बिना निर्माण पर नहीं मिलेगी राहत
एसएमडीए ने यह भी स्पष्ट किया कि नियंत्रित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण करने से पहले प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना स्वीकृति के किए गए निर्माणों को नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम के तहत कभी भी गिराया जा सकता है।
प्राधिकरण के अनुसार यह कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट, एसएमडीए के कार्यकारी अभियंता, इंफोर्समेंट टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से की गई।
अवैध कॉलोनियां क्यों बन रही हैं समस्या
पिछले कुछ वर्षों में शहरी विस्तार और बढ़ती आबादी के चलते अवैध कॉलोनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सस्ते प्लॉट और त्वरित कब्जे का लालच देकर बिल्डर नियमों को दरकिनार कर कॉलोनियां विकसित कर देते हैं। बाद में इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, कानूनी विवाद और विकास कार्यों में बाधाएं सामने आती हैं। प्रशासन का मानना है कि समय रहते कार्रवाई कर इन समस्याओं को रोका जा सकता है।