शमशाबाद में गुरु रविदास जयंती समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर
संतों और महापुरुषों की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं होती, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम भी बनती है। पलवल जिले के शमशाबाद में आयोजित गुरु रविदास जयंती समारोह इसी भावना का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया, जहां सामाजिक एकता और समरसता का संदेश प्रमुख रूप से उभरा।
इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संत किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे पूरे समाज की साझा धरोहर होते हैं। उनका जीवन और विचार मानवता को जोड़ने का कार्य करते हैं।
आयोजन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
गुरु रविदास जयंती शमशाबाद कार्यक्रम का आयोजन बाबू जगजीवन राम दलित उत्थान ट्रस्ट (पंजीकृत) के तत्वावधान में बाबू जगजीवन राम पार्क में किया गया। आयोजन का उद्देश्य संत गुरु रविदास के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना और सामाजिक समानता के मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा।
हरियाणा में संत परंपरा और सामाजिक सुधार आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को सामाजिक न्याय, भाईचारे और समावेशी सोच से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा का अनावरण और भवन उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इसके साथ ही संत शिरोमणि गुरु रविदास के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी किया गया।
उन्होंने गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और कहा कि ऐसे स्मारक और भवन केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा के केंद्र होते हैं।
गुरु रविदास के विचारों की सामाजिक प्रासंगिकता
जाति-पाति से ऊपर मानवता का संदेश
गुरु रविदास जयंती शमशाबाद समारोह को संबोधित करते हुए कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि संत गुरु रविदास ने अपने विचारों से समाज सुधार की दिशा बदली। उन्होंने ऊंच-नीच, जाति-पाति और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समानता पर आधारित समाज की कल्पना की।
उन्होंने गुरु रविदास के प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मन और कर्म पवित्र हों, तो समाज से भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाता है।
संतों की परंपरा और भारत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की भूमि संत-महापुरुषों की भूमि रही है। संतों ने हमेशा समाज को प्रेम, सद्भावना और भाईचारे का मार्ग दिखाया है। यही कारण है कि संतों के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे।
सरकारी नीतियां और गुरु रविदास के विचार
कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं।
मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और हर घर नल से जल जैसी योजनाएं सामाजिक समानता के उसी विचार को आगे बढ़ाती हैं, जिसकी प्रेरणा संत गुरु रविदास के विचारों से मिलती है।
गुरु रविदास भवन को लेकर आश्वासन
गुरु रविदास जयंती शमशाबाद कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने आयोजकों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि गुरु रविदास भवन के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे सामाजिक भवन समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी होते हैं और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र बनते हैं।
जनप्रतिनिधियों के विचार
विधायक हरेंद्र सिंह का संबोधन
कार्यक्रम संयोजक और होडल विधायक हरेंद्र सिंह ने कहा कि कृष्णपाल गुर्जर ने दलित समाज के उत्थान के लिए लगातार कार्य किया है। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य हुए हैं और सामाजिक संरचनाओं के निर्माण में केंद्रीय मंत्री का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
विधायक डॉ. कृष्ण कुमार की बात
बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि गुरु रविदास केवल संत नहीं थे, बल्कि समाज को समानता और मानवता की दिशा देने वाले महान विचारक थे। उन्होंने पाखंडवाद का विरोध कर अच्छे कर्म और आचरण पर बल दिया।
अन्य वक्ताओं के विचार
पूर्व मंत्री हर्ष कुमार और पूर्व विधायक दीपक मंगला ने भी गुरु रविदास के विचारों को आज के समाज के लिए प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि संतों की शिक्षाएं समाज को मजबूत और सकारात्मक बनाती हैं।
सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक वातावरण
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सहित सभी अतिथियों का परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया। इस दौरान कृष्णपाल गुर्जर का जन्मदिन भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिससे आयोजन में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
कई गांवों के पंच-सरपंच, वार्ड पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की सामाजिक व्यापकता स्पष्ट हुई।
इस खबर का असर क्या होगा?
गुरु रविदास जयंती शमशाबाद जैसे आयोजन समाज में सामाजिक समरसता और समानता के मूल्यों को मजबूत करेंगे। इससे जाति और वर्ग से ऊपर उठकर संतों के विचारों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।
लंबी अवधि में ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देंगे।
निष्कर्ष
गुरु रविदास जयंती शमशाबाद समारोह ने यह स्पष्ट किया कि संतों के विचार आज भी समाज को जोड़ने की शक्ति रखते हैं। कृष्णपाल गुर्जर द्वारा दिया गया संदेश सामाजिक समानता और भाईचारे की दिशा में महत्वपूर्ण है। यदि समाज संतों के विचारों को व्यवहार में उतारे, तो एक समरस, सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।