फरीदाबाद साइबर ठगी मामले की जांच करते साइबर थाना NIT के अधिकारी
फरीदाबाद साइबर ठगी मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि डिजिटल युग में अपराधी किस तरह लोगों के डर और कानून के नाम का इस्तेमाल कर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं। साइबर थाना NIT की टीम ने ऐसे ही एक मामले में अहम कार्रवाई करते हुए उस खाताधारक को गिरफ्तार किया है, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।
यह मामला न केवल साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, बल्कि आम नागरिकों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि किसी भी अनजान कॉल या सरकारी एजेंसी के नाम पर किए गए दावे पर बिना पुष्टि भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि और शिकायत का विवरण
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-46 फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना NIT में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 3 नवंबर 2025 को उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ATS का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उसके बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन हुआ है और इसकी RBI से जांच होनी है।
कॉल करने वाले ने गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर शिकायतकर्ता को मानसिक दबाव में डाल दिया। डर और भ्रम की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति ने अपनी रकम “वेरिफिकेशन” के नाम पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी।
फरीदाबाद साइबर ठगी मामला: कैसे हुई 30.5 लाख रुपये की ठगी
जांच में सामने आया कि ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से पीड़ित को कई ट्रांजेक्शन करने के लिए कहा। अलग-अलग खातों में कुल 30,50,023 रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में जब शिकायतकर्ता को ठगी का अहसास हुआ, तो उसने तुरंत साइबर थाना NIT से संपर्क किया।
साइबर थाना NIT ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों और ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच के दौरान पुलिस एक महत्वपूर्ण खाताधारक तक पहुंची।
खाताधारक की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस ने मिर्जा मुस्तफा (32), निवासी हैदराबाद, तेलंगाना को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी इस पूरे फरीदाबाद साइबर ठगी मामले में खाताधारक था, जिसने अपना बैंक खाता ठगों को उपलब्ध कराया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी 12वीं पास है और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। उसके खाते में ठगी की रकम में से लगभग 20 लाख रुपये आए थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपना खाता आगे इस्तेमाल के लिए दिया था, हालांकि ठगी की पूरी साजिश में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
साइबर थाना NIT की रणनीति और जांच प्रक्रिया
साइबर थाना NIT की टीम ने डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स के आधार पर मामले की परतें खोलीं। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में खाताधारकों की भूमिका बेहद अहम होती है, क्योंकि बिना खाते के ठग पैसे का लेन-देन नहीं कर सकते।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कॉल करने वाले ही नहीं, बल्कि जानबूझकर अपना खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति भी अपराध की श्रेणी में आते हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
बढ़ते साइबर अपराध और आम नागरिकों की जिम्मेदारी
फरीदाबाद साइबर ठगी मामला यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब खुद को ATS, CBI, पुलिस या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। गिरफ्तारी, RBI जांच या कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर वे पीड़ित को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर इस तरह से पैसे की मांग नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फरीदाबाद साइबर ठगी मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और ठगी की रकम किन अन्य खातों में ट्रांसफर की गई।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में नेटवर्क अक्सर राज्य या देश की सीमाओं से बाहर तक फैला होता है, इसलिए जांच में समय लग सकता है, लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस खबर का असर क्या होगा?
फरीदाबाद साइबर ठगी मामला आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने का काम करेगा। यह खबर स्पष्ट संदेश देती है कि गिरफ्तारी या जांच के नाम पर की गई किसी भी कॉल से सावधान रहना जरूरी है। साथ ही, खाताधारकों के लिए यह चेतावनी है कि अपने बैंक खाते का दुरुपयोग होने देना भी गंभीर अपराध है, जिसके लिए जेल तक जाना पड़ सकता है।