जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से युवक कमल ध्यानी की मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलते दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष।
नई दिल्ली के जनकपुरी इलाके में गड्ढे में गिरने से युवक कमल ध्यानी की मौत ने एक बार फिर राजधानी की बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा केवल एक व्यक्ति की जान जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी अव्यवस्था और सरकारी लापरवाही की व्यापक तस्वीर को उजागर करता है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेंद्र यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और इस घटना को “सरकारी लापरवाही, भ्रष्टाचार और लालच का परिणाम” बताया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कमल ध्यानी के परिवार को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर आवाज उठाएगी।
हादसे की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
जनकपुरी क्षेत्र में सड़क खुदाई के बाद बने खुले गड्ढे में गिरने से युवक कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से खुदाई का काम चल रहा था, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। न तो गड्ढे को ठीक से ढका गया और न ही चेतावनी संकेत लगाए गए।
इस तरह की लापरवाही कोई नई बात नहीं है। दिल्ली के कई इलाकों में सड़क, सीवर और जल आपूर्ति से जुड़े कार्यों के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। जनकपुरी गड्ढा हादसा कमल ध्यानी इसी श्रृंखला की एक दुखद कड़ी बन गया है।
कांग्रेस का आरोप और सरकार पर सवाल
पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बातचीत में श्री देवेंद्र यादव ने कहा कि कमल की मौत के बाद उसका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौत की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन कमल परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था, इसलिए सरकार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए छोटे ठेकेदारों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली दोषी बड़े स्तर पर बैठे अधिकारी और एजेंसियां हैं। उनके अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
जांच की मांग और प्रशासनिक भूमिका
कांग्रेस ने इस मामले में उपराज्यपाल से मांग की है कि जनकपुरी गड्ढा हादसा कमल ध्यानी की जांच दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए। पार्टी का कहना है कि निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और किन स्तरों पर लापरवाही हुई।
श्री देवेंद्र यादव ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना स्थल से महज दो किलोमीटर के दायरे में मौजूद पुलिस रात भर युवक को ट्रेस नहीं कर पाई, जो गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। उनके अनुसार, जांच में पुलिस की भूमिका की भी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
दिल्ली की सड़कों पर बढ़ता खतरा
दिल्ली में सड़क खुदाई और अधूरे कार्यों के कारण दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर दिन लाखों लोग काम के लिए घर से निकलते हैं और ऐसे खुले गड्ढे उनके जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं। कमल ध्यानी जैसे हादसे यह साबित करते हैं कि समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे शहर में फैली हुई है।
श्री देवेंद्र यादव ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया गया, तो कोई भी नागरिक अगला शिकार बन सकता है। उन्होंने एजेंसियों और ठेकेदारों को सुरक्षा मानकों के तहत काम करने के लिए बाध्य करने की मांग की।
सरकार की प्रतिक्रिया और आलोचना
हादसे के बाद दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली जल बोर्ड से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1916 जारी किया गया। कांग्रेस ने इसे “काम चलाऊ प्रतिक्रिया” बताते हुए कहा कि यह कदम सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश है, न कि स्थायी समाधान।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज करेंगी, खासकर तब जब शहरी बुनियादी ढांचे की स्थिति पहले से ही सवालों के घेरे में हो।
इस खबर का असर क्या होगा?
जनकपुरी गड्ढा हादसा कमल ध्यानी का मामला राजधानी में सड़क सुरक्षा, ठेकेदारी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। यदि निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई होती है, तो भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीतिगत बदलाव संभव हैं। वहीं, पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा मिलने से सरकार पर भरोसा बहाल करने की दिशा में एक कदम माना जाएगा।
निष्कर्ष
कमल ध्यानी की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी शासन प्रणाली की गंभीर खामियों का प्रतीक है। जब तक सरकारी एजेंसियों, ठेकेदारों और निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक दिल्ली की सड़कों पर आम नागरिक सुरक्षित नहीं कहे जा सकते। यह मामला प्रशासन के लिए चेतावनी है कि लापरवाही की कीमत आम लोगों की जान से नहीं चुकाई जानी चाहिए।