सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल पर आयोजित जिला स्तरीय साइबर जागरूकता कार्यक्रम।
सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल: साइबर जागरूकता का संदेश
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल के अवसर पर जिला सचिवालय में एक महत्वपूर्ण जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन और सरकारी कर्मचारियों को इंटरनेट के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा।
एनआईसी पलवल द्वारा आयोजित इस जिला स्तरीय सेमिनार में प्रशासनिक अधिकारियों, विधिक विशेषज्ञों और साइबर विशेषज्ञों ने भाग लेकर डिजिटल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का मुख्य विषय रहा—स्मार्ट तकनीक के बीच सुरक्षित विकल्प और एआई का जिम्मेदार उपयोग।
साइबर खतरों के बीच सजग रहने की जरूरत
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि आज इंटरनेट केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक लेनदेन और सामाजिक संवाद का बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। ऐसे में थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई टूल्स का बढ़ता उपयोग नई संभावनाएं लेकर आया है, लेकिन इनके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नीतिगत समझ और कानूनी जानकारी जरूरी है। उनका संदेश था कि नियमों के दायरे में रहकर तकनीक का उपयोग करने से ही वास्तविक लाभ संभव है।
एआई और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष सत्र
सेमिनार में साइबर विशेषज्ञों ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदे और संभावित जोखिमों की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई आधारित टूल्स जहां कार्यकुशलता बढ़ाते हैं, वहीं डेटा गोपनीयता और दुरुपयोग के खतरे भी मौजूद रहते हैं।
इस अवसर पर एक एआई आधारित व्हाट्सऐप चैटबोट और सूचना पुस्तिका भी जारी की गई, जिसका उद्देश्य नागरिकों को तुरंत मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। डिजिटल एरेस्ट जैसी नई प्रकार की ऑनलाइन ठगी पर भी विशेष चर्चा की गई, जिससे हाल के समय में कई लोग प्रभावित हुए हैं।
साइबर ठगी से बचाव के व्यावहारिक उपाय
कार्यक्रम में ‘स्टॉप, थिंक, टेक एक्शन’ की रणनीति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। अधिकारियों ने समझाया कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या निवेश प्रस्ताव पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले ठहरें, सोचें और सत्यापन करें।
नागरिकों को सलाह दी गई कि वे कभी भी अपना ओटीपी, पासवर्ड, एमपिन या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। पासवर्ड को नियमित रूप से बदलना, दो-स्तरीय सत्यापन का उपयोग करना और सुरक्षित ब्राउज़र का प्रयोग करना आवश्यक है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रोफाइल गोपनीयता सेटिंग्स को सीमित रखना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना और स्क्रीन शेयरिंग से बचना भी डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण कदम बताए गए।
प्रशासन और एनआईसी की पहल
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के जिला सूचना अधिकारी ने बताया कि सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों को भी डिजिटल जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाना है।
कार्यक्रम में पावर प्वाइंट प्रस्तुति और लघु वीडियो के माध्यम से साइबर अपराधों के वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए गए। इससे प्रतिभागियों को यह समझने में आसानी हुई कि किस प्रकार धोखाधड़ी के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
बढ़ते डिजिटल लेनदेन और जोखिम
आज अधिकांश लोग मोबाइल के माध्यम से बैंकिंग, खरीदारी और निवेश कर रहे हैं। ऑनलाइन निवेश के नाम पर आकर्षक ऑफर देकर ठगी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की जांच अनिवार्य है।
लालच और जल्दबाजी साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है। इसलिए नागरिकों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रलोभन में न आएं और सत्यापन के बिना कोई वित्तीय निर्णय न लें।
इस खबर का असर क्या होगा?
सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल जैसे जागरूकता कार्यक्रमों का सीधा प्रभाव नागरिकों की डिजिटल सतर्कता पर पड़ेगा। जब लोग साइबर ठगी के तरीकों और बचाव के उपायों को समझेंगे, तो धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की संभावना बढ़ेगी।
प्रशासनिक स्तर पर भी यह पहल डिजिटल शासन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में सहायक होगी। एआई और नई तकनीकों के उपयोग में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने से भविष्य में तकनीक का लाभ अधिक और जोखिम कम होगा।
निष्कर्ष
डिजिटल दुनिया अवसरों से भरी है, लेकिन यह जोखिमों से मुक्त नहीं है। सुरक्षित इंटरनेट दिवस पलवल के अवसर पर दिया गया संदेश स्पष्ट है—सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी है। यदि नागरिक जागरूक, विवेकपूर्ण और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाते हैं, तो साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। तकनीक का लाभ तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समझदारी और सावधानी के साथ किया जाए।