लघु सचिवालय में आयोजित पलवल समाधान शिविर समीक्षा बैठक में अधिकारी उपस्थित।
पलवल, 11 फरवरी। पलवल समाधान शिविर समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन ने लंबित शिकायतों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्पष्ट किया कि समाधान शिविर, सीएम विंडो और जनसंवाद पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पेंडिंग मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाकर पोर्टल पर अद्यतन रिपोर्ट अपलोड करना सुनिश्चित करें। बैठक लघु सचिवालय सभागार में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
H2: पलवल समाधान शिविर समीक्षा में पारदर्शिता पर जोर
उपायुक्त ने विभागवार समीक्षा करते हुए पाया कि पंचायत एवं राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। उन्होंने इन विभागों को विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) निर्धारित प्रारूप में ही अपलोड की जाए और प्रत्येक कॉलम की विधिवत पूर्ति की जाए।
H3: गुणवत्तापूर्ण एटीआर और पुनः खुली शिकायतों पर विशेष निर्देश
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जो शिकायतें दो या अधिक बार पुनः खोली गई हैं, उनमें सक्षम हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से करवाए जाएं। एटीआर में स्पष्ट ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ दर्ज किया जाए ताकि शिकायतकर्ता को संतोषजनक जानकारी मिल सके।उन्होंने अधिकारियों को प्रतिदिन पोर्टल की निगरानी करने और समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि किसी भी विभागाध्यक्ष द्वारा शिकायत लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा।
H2: दिशा समिति की समीक्षा और विकास कार्यों पर फोकस
इसी दिन मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) के कार्यों की समीक्षा भी की गई। उपायुक्त ने जिला स्तर पर अधिकारियों की बैठक लेकर विकास योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जाए।
H2: विद्यालयों में प्राथमिक उपचार किट वितरण
बैठक के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हरियाणा रेडक्रॉस सोसाइटी के सहयोग से राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक उपचार किट वितरण अभियान की शुरुआत की गई।उपायुक्त ने कहा कि स्कूलों में आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था अनिवार्य है। किट में आवश्यक दवाइयां, एंटीसेप्टिक, बैंडेज, थर्मामीटर सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है।उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि किट को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और इसके उपयोग के लिए जिम्मेदार कर्मचारी नामित किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों को सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देने पर भी बल दिया गया।
H2: प्रशासनिक प्राथमिकताएं और जनसंतोष
पलवल समाधान शिविर समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि प्रशासन सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य कर रहा है। शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाना और विकास योजनाओं की निगरानी करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।इस खबर का असर क्या होगा?इस पहल से आम नागरिकों को अपनी शिकायतों के त्वरित समाधान की उम्मीद बढ़ेगी। यदि लंबित मामलों को वास्तव में शून्य स्तर पर लाया जाता है, तो प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और जनविश्वास में वृद्धि होगी। साथ ही विकास योजनाओं की निगरानी से कार्यों की गुणवत्ता में सुधार की संभावना है।
निष्कर्ष
पलवल समाधान शिविर समीक्षा बैठक ने प्रशासनिक कार्यशैली में सख्ती और पारदर्शिता का संकेत दिया है। शिकायत निवारण, विकास कार्यों की समीक्षा और विद्यालय सुरक्षा जैसे विषयों पर समानांतर ध्यान देना प्रशासन की बहुआयामी जिम्मेदारी को दर्शाता है। अब देखना होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है।