सोनीपत सीएसआर फंड बैठक में शिक्षा और स्वास्थ्य परियोजनाओं पर चर्चा करते अधिकारी
सोनीपत में सीएसआर फंड के प्रभावी उपयोग पर मंथन
सोनीपत सीएसआर फंड बैठक में जिला प्रशासन और उद्योग जगत के बीच समन्वय को नई दिशा देने का प्रयास किया गया। उपायुक्त सुशील सारवान की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में मारुति सुजुकी खरखौदा प्लांट के अधिकारियों के साथ जिले में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के उपयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य फोकस यह रहा कि सीएसआर संसाधनों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर लगाया जाए, ताकि इसका सीधा लाभ ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों व आम नागरिकों तक पहुंच सके।
शिक्षा क्षेत्र में सोलर सुविधाओं पर विशेष जोर
बैठक में सरकारी स्कूलों की आधारभूत जरूरतों को चिन्हित करने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सीएसआर फंड का उपयोग स्कूलों में सोलर संचालित पंखे और लाइट लगाने के लिए किया जाना चाहिए। इससे न केवल बिजली खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि सोलर कनेक्शन सीधे ग्रिड से जोड़ा जाए, ताकि दीर्घकालिक और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। जिला शिक्षा अधिकारी को सभी सरकारी स्कूलों की आवश्यकता के अनुसार एक विस्तृत सूची तैयार करने को कहा गया, जिससे प्राथमिकता तय कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य शुरू किया जा सके।
विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की तैयारी
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को समय पर रजिस्टर उपलब्ध कराए जाएं। अप्रैल माह से पहले आवश्यक सामग्री वितरण की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए आरओ सिस्टम लगाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े इन उपायों को विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ा गया। अधिकारियों ने माना कि बेहतर आधारभूत सुविधाएं सीधे तौर पर विद्यार्थियों की उपस्थिति और प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं।
डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर ध्यान
बैठक में केवल पारंपरिक सुविधाओं तक सीमित न रहकर डिजिटल साक्षरता और स्किल डेवलपमेंट को भी प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि बदलते समय में छात्रों को तकनीकी ज्ञान और व्यावसायिक कौशल से जोड़ना आवश्यक है।
सीएसआर फंड के माध्यम से कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम या अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षा संसाधनों तक पहुंच मिल सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की पहल
शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सीएसआर फंड के उपयोग पर विचार किया गया। बैठक में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।
डिप्टी सीएमओ और अन्य संबंधित अधिकारियों ने सुझाव दिया कि बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। इससे कुपोषण, संक्रमण और अन्य सामान्य बीमारियों पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
प्रशासन और उद्योग के बीच समन्वय
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त, डीएफओ, जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य विभागीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि प्रशासन इस पहल को बहु-विभागीय समन्वय के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।
सीएमजीजीए के साथ भी चर्चा की गई, ताकि योजनाओं की निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन को मजबूत बनाया जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि सीएसआर फंड का उपयोग केवल प्रतीकात्मक न रहकर परिणाम आधारित हो।
दीर्घकालिक योजना की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग और प्रशासन के बीच इस तरह का सहयोग नियमित रूप से जारी रहता है, तो जिले में बुनियादी सुविधाओं का स्तर तेजी से सुधर सकता है। सीएसआर फंड के पारदर्शी और योजनाबद्ध उपयोग से सरकारी संस्थानों की गुणवत्ता में स्थायी सुधार संभव है।
सोनीपत सीएसआर फंड बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी को स्थानीय जरूरतों से जोड़ा गया।
निष्कर्ष
सोनीपत सीएसआर फंड बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि संसाधनों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में केंद्रित ढंग से किया जाए, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन और उद्योग के बीच यह संवाद भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।
इस खबर का असर क्या होगा?
इस पहल से सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। सोलर ऊर्जा, स्वच्छ पेयजल और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ होने से बच्चों की नियमित उपस्थिति और सीखने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार संभव है।