बजट सत्र में सरकार की नीतियों पर प्रकाश डालते मंत्री।
हरियाणा विधानसभा बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा ने राजनीतिक हलकों में नई सक्रियता ला दी है। हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में शहरी स्थानीय निकाय, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री विपुल गोयल ने सदन में उठाए गए प्रश्नों का जवाब देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों को विस्तार से रखा।
सदन में दिए गए उनके वक्तव्य को सरकार की नीतिगत दिशा और प्रशासनिक दृष्टिकोण की स्पष्ट प्रस्तुति के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनहित, पारदर्शिता और सुशासन को केंद्र में रखकर निर्णय ले रही है।
हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में उठे प्रमुख मुद्दे
बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने शहरी विकास, कॉलोनियों की वैधता, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे विषयों पर सवाल उठाए। इन प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने कहा कि सरकार नियोजित विकास और विधिसम्मत प्रक्रियाओं के तहत कार्य कर रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच 858 कॉलोनियों को विधिवत स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं और कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। मंत्री के अनुसार यह पहल शहरी ढांचे को व्यवस्थित करने और नागरिकों को राहत देने की व्यापक नीति का हिस्सा है।
शहरी विकास और आधारभूत संरचना पर जोर
सरकार का दावा है कि स्वीकृत कॉलोनियों में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य जारी है। पेयजल, सड़क, सीवरेज और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियमित कॉलोनियों को वैधता देना शहरी नियोजन की बड़ी चुनौती का समाधान हो सकता है, बशर्ते विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। इससे नागरिकों को संपत्ति अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का पक्ष
मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रत्येक निर्णय प्रचलित कानूनों और नियमों के अनुरूप लिया जा रहा है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दे रही है। राजस्व और आपदा प्रबंधन से जुड़े मामलों में भी त्वरित समाधान और नागरिक सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है।
विपक्ष और सरकार के बीच संवाद
लोकतांत्रिक व्यवस्था में बजट सत्र को नीति समीक्षा और जवाबदेही का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को सरकार के लिए अपनी नीतियों को स्पष्ट करने का अवसर भी समझा जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की बहसें प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करती हैं और जनता के समक्ष तथ्यों को सामने लाने में सहायक होती हैं।
नागरिक उड्डयन और आपदा प्रबंधन पर दृष्टिकोण
विपुल गोयल के पास नागरिक उड्डयन और आपदा प्रबंधन विभाग भी है। उन्होंने संकेत दिया कि इन क्षेत्रों में भी संरचनात्मक सुधार और बेहतर समन्वय की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को सुदृढ़ बनाने और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों के समुचित उपयोग पर जोर दिया गया है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में योजनाएं प्रगति पर हैं।