लघु सचिवालय में जाम और नशा मुक्त शहर को लेकर आयोजित बैठक का दृश्य।
सोनीपत जाम व नशा मुक्त अभियान को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक पहल शुरू कर दी है। उपायुक्त सुशील सारवान ने स्पष्ट किया कि शहर में बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति अपनाएगा।
लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में शहर की प्रमुख समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।
सोनीपत जाम व नशा मुक्त अभियान की रूपरेखा
बैठक के दौरान उपायुक्त ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर नशे की गतिविधियों की शिकायतें मिली हैं, वहां नियमित गश्त बढ़ाई जाए। साथ ही महिला स्कूलों और कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा बेचने या इसके प्रसार में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सामाजिक संगठनों के सहयोग से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
ट्रैफिक जाम से निपटने की रणनीति
शहर में बढ़ते जाम की समस्या पर नगर निगम और पुलिस अधिकारियों को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों के बाहर सामान न रखने और रेहड़ी संचालकों को निर्धारित स्थानों पर ही व्यवसाय करने के लिए जागरूक करने की बात कही गई।
चौराहों और प्रमुख बाजारों में टैक्सी व अन्य वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग पर भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित कर आम नागरिकों का समय और ईंधन दोनों बचाया जा सके।
सौंदर्यकरण और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस
बैठक में शहर के ऐतिहासिक स्थलों, विशेषकर खिज्र मकबरा क्षेत्र में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया। उपायुक्त ने नगर निगम को इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के निर्देश दिए।
इसके अलावा सड़कों की मरम्मत, सफाई व्यवस्था को मजबूत करने, स्ट्रीट लाइटों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यकरण के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।
मासिक समीक्षा की तैयारी
प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस तरह की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि समस्याओं की समीक्षा कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। एसडीएम को विभिन्न विभागों और संगठनों के साथ संयुक्त निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नाम परिवर्तन की मांग पर प्रशासन का रुख
बैठक में कुछ संगठनों ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए शहर का नाम बदलने की मांग भी उठाई। उपायुक्त ने कहा कि इस प्रस्ताव को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान मूलभूत सुविधाओं और कानून व्यवस्था पर रहेगा।
सामाजिक भागीदारी की अहमियत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर को जाम और नशे जैसी जटिल समस्याओं से मुक्त करने के लिए केवल सरकारी तंत्र पर्याप्त नहीं होता। स्थानीय संगठनों, व्यापारिक समुदाय और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
प्रशासन की यह पहल सामुदायिक सहयोग की दिशा में एक कदम मानी जा रही है, जहां समस्याओं की पहचान से लेकर समाधान तक सभी की भूमिका तय की जा रही है।
इस खबर का असर क्या होगा?
सोनीपत जाम व नशा मुक्त अभियान यदि प्रभावी ढंग से लागू होता है तो शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार, युवाओं में नशे की रोकथाम और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
साथ ही प्रशासन और नागरिक संगठनों के बीच संवाद की परंपरा मजबूत होगी, जिससे भविष्य में अन्य शहरी समस्याओं के समाधान का रास्ता भी आसान बनेगा।