सेक्टर-15 दशहरा मैदान में आयोजित पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी में कारीगर अपने उत्पाद प्रदर्शित करते हुए।
सोनीपत के सेक्टर-15 स्थित दशहरा मैदान में आयोजित पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को एक संगठित मंच उपलब्ध कराया है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम की शुरुआत 27 फरवरी को हुई, जिसमें जिला प्रशासन और एमएसएमई मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।यह आयोजन केवल उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों को आधुनिक बाजार व्यवस्था, डिजिटल तकनीक और वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का प्रयास भी है। स्थानीय स्तर पर इसे स्वरोजगार और कौशल उन्नयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत का उद्देश्य और महत्व
इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कौशल को बाजार से जोड़ना और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और डिजिटल भुगतान प्रणाली की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि छोटे उद्यमी प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।उद्घाटन अवसर पर जिला उपायुक्त ने कहा कि ऐसे आयोजन ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों से प्रदर्शनी में अधिक से अधिक भागीदारी का आह्वान किया।
तकनीकी सत्रों पर विशेष जोर
प्रदर्शनी के दौरान डिजिटल मार्केटिंग, वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने कारीगरों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के तरीके समझाए।आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में डिजिटल पहचान का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में इन सत्रों को कारीगरों के लिए व्यावहारिक और उपयोगी बताया गया।
युवाओं की भागीदारी और रचनात्मक प्रतियोगिताएं
कार्यक्रम के पहले दिन इंटर कॉलेज स्तर पर मेहंदी और क्रिएटिव नेल आर्ट प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों का कहना है कि पारंपरिक कला और आधुनिक रचनात्मकता के संयोजन से युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित किया जा सकता है।इस पहल से यह संकेत भी मिलता है कि कौशल विकास केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मक क्षेत्रों में भी अवसर उपलब्ध हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत जैसे आयोजनों का सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों को मिल सकता है। जब उत्पादों की सीधी बिक्री और बाजार से संपर्क स्थापित होता है, तो आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।इसके साथ ही, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की मौजूदगी से कारीगरों को ऋण और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही है। इससे औपचारिक आर्थिक ढांचे से जुड़ाव मजबूत होता है।
योजना की पृष्ठभूमि और व्यापक दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है। बदलते बाजार परिदृश्य में छोटे शिल्पकारों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती है। ऐसे में प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना आवश्यक हो जाता है।
निष्कर्ष
समग्र रूप से, पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की एक संगठित पहल है। यदि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहें और कारीगरों को निरंतर मार्गदर्शन मिले, तो इसका सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर देखा जा सकता है।