सोनीपत के भटगांव में आयोजित कार्यक्रम में गौशालाओं के लिए 68.34 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की गई।
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हरियाणा में गौसंरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। हरियाणा गौशाला अनुदान राशि के तहत राज्य की 602 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 68 करोड़ 34 लाख रुपये की चारा सहायता जारी की गई है। यह घोषणा सोनीपत जिले के भटगांव में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में की गई। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल तात्कालिक राहत नहीं है, बल्कि गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
हरियाणा गौशाला अनुदान राशि का वितरण और दायरा
जारी की गई सहायता का लाभ प्रदेशभर की 602 पंजीकृत गौशालाओं को मिलेगा। सोनीपत जिले की 27 गौशालाओं के लिए 5 करोड़ 60 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले सवा 11 वर्षों में गौशालाओं को 457 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी थी। नई राशि जोड़ने के बाद कुल अनुदान 525 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह दर्शाता है कि गौसंवर्धन को निरंतर बजटीय समर्थन दिया जा रहा है।
गौशालाओं की संख्या और बढ़ती क्षमता
वर्ष 2014 में राज्य में 215 पंजीकृत गौशालाएं थीं, जिनमें लगभग 1.75 लाख गोवंश को आश्रय मिला हुआ था। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 697 हो गई है और लगभग चार लाख बेसहारा गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। यह विस्तार सरकारी योजनाओं और सामाजिक सहयोग का संयुक्त परिणाम माना जा रहा है।
सोलर ऊर्जा से खर्च में कमी की योजना
गौशालाओं के संचालन खर्च को कम करने के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 330 गौशालाओं में सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। लक्ष्य है कि वर्ष 2026-27 तक सभी पंजीकृत गौशालाएं सौर ऊर्जा आधारित परिसरों में परिवर्तित हो जाएं। रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे खर्च कम होगा।
पंचगव्य उत्पाद और ई-रिक्शा से आय सृजन
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 101 इकाइयों को पंचगव्य आधारित उत्पाद निर्माण के लिए मशीनरी अनुदान दिया गया है। जैविक खाद, प्राकृतिक पेंट, धूपबत्ती और गोबर से बने अन्य उत्पाद स्थानीय बाजार में आय का स्रोत बन सकते हैं। ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे उत्पादों की मार्केटिंग आसान हो सके।
गौवंश के स्वास्थ्य और अभयारण्य
बड़ी गौशालाओं में नियमित पशु चिकित्सक की ड्यूटी सुनिश्चित की गई है। छोटी इकाइयों में तकनीकी सहायक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाएं भी शुरू की गई हैं, ताकि दूरदराज क्षेत्रों में समय पर उपचार मिल सके। राज्य में दो गौ-अभयारण्यों की स्थापना की गई है, जहां हजारों बेसहारा गोवंश को संरक्षित वातावरण में रखा जा सकता है।
देसी नस्ल संरक्षण और राष्ट्रीय गोकुल मिशन
देसी नस्लों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहन योजनाएं लागू हैं। दूध उत्पादन के आधार पर 5 हजार से 20 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से नस्ल सुधार और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि देसी नस्लें प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कानूनी संरक्षण और प्रशासनिक सख्ती
राज्य में लागू गौ-संरक्षण कानून के तहत अवैध गतिविधियों पर कड़े दंड का प्रावधान है। प्रशासन का दावा है कि इससे तस्करी और अवैध वध की घटनाओं पर नियंत्रण मजबूत हुआ है।
निष्कर्ष
हरियाणा गौशाला अनुदान राशि केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि संरक्षण और आत्मनिर्भरता की संयुक्त रणनीति का हिस्सा है। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो इससे गौशालाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक आधार मिल सकता है।