सोनीपत के उपायुक्त सुशील सारवान ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के यौन अपराध, दुव्र्यवहार या शोषण की घटनाओं को गंभीरता से लें और तुरंत जिला बाल संरक्षण इकाई को इसकी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि समाज की चुप्पी ही अपराधियों को बढ़ावा देती है, इसलिए हर व्यक्ति की सतर्कता बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
उपायुक्त ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शारीरिक, मानसिक और यौन सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा पोक्सो अधिनियम, 2012 लागू किया गया है। इस कानून के तहत बच्चों के साथ छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, अश्लील इशारे करना, आपत्तिजनक सामग्री दिखाना या किसी भी प्रकार का शोषण गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
उन्होंने माता-पिता, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। साथ ही बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें ताकि वे किसी भी गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा सकें।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध या आपत्तिजनक घटना की सूचना पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्डलाइन 1098 या जिला बाल संरक्षण इकाई, सोनीपत (लघु सचिवालय, कक्ष संख्या-304) को दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखना कानूनन अनिवार्य है और पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर दी गई सूचना किसी मासूम के जीवन को सुरक्षित बना सकती है।