सुनारों की बगीची में आयोजित बाल श्रम विरोधी अभियान में उपस्थित अधिकारी
पलवल, बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति समाज और राष्ट्र के समग्र विकास में बड़ी बाधा बन रही है। यह बात उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने मालगोदाम रोड स्थित सुनारों की बगीची में आयोजित बाल श्रम उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और शिक्षित बनाना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर आयोजित संयुक्त अभियान में श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, मानव तस्करी विरोधी इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन, शिक्षा विभाग और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य दया बस्ती सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और अभिभावकों को बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा बच्चों के कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
उपायुक्त डॉ. वशिष्ठ ने दुकानदारों, फैक्ट्री संचालकों और स्थानीय नागरिकों को स्पष्ट रूप से बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन अपराध है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कार्यों में लगाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम निषेध अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और अभिभावकों से अपील की गई कि वे अपने बच्चों को विद्यालय भेजें। अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर ले जा सकती है।
उपायुक्त ने कहा कि इस तरह के जागरूकता अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने सभी विभागों से समन्वय के साथ नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाने का आह्वान किया।