सोनीपत में अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन की अध्यक्षता में दयालु-2 योजना की समीक्षा बैठक में आवारा कुत्तों के काटने पर आर्थिक सहायता के दिशा-निर्देशों पर चर्चा।
हरियाणा सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु-2) के तहत आवारा कुत्तों या बेसहारा पशुओं के काटने से हुई चोट, दिव्यांगता या मृत्यु पर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है। यह कदम खास तौर पर ग्रामीण और शहरी इलाकों में बढ़ते कुत्ता और पशु काटने के मामलों को देखते हुए उठाया गया है।
सोनीपत में अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में योजना के सभी बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आम जनता को योजना की जानकारी सरल भाषा में दें और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाएं।
क्या है दयालु-2 योजना में मदद की सीमा?
दयालु-2 योजना के तहत सहायता राशि की सीमा पीड़ित की उम्र और चोट की गंभीरता के आधार पर तय की गई है। इसमें मृत्यु या 70% से अधिक दिव्यांगता होने पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
आयु के आधार पर सहायता राशि का स्वरूप इस प्रकार है:
- 12 साल तक: 1 लाख रुपये
- 12 से 18 साल: 2 लाख रुपये
- 18 से 25 साल: 3 लाख रुपये
- 25 से 45 साल: 5 लाख रुपये
- 45 साल से अधिक: 3 लाख रुपये
इसके अलावा, चोट पर न्यूनतम 10 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान भी है।
आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
पीड़ित परिवार या व्यक्ति को घटना के 90 दिन के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके लिए परिवार पहचान पत्र (PPP) अनिवार्य है।
आवेदन के बाद जिला स्तर पर गठित कमेटी अंतिम निर्णय लेगी। इस कमेटी की अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे और सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
योजना का लाभ लेने के लिए नागरिक https://dapsy.finhry.gov.in पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला सांख्यिकी अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ?
सोनीपत के लघु सचिवालय में हुई बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे योजना की जानकारी आम जनता तक पहुंचाएं और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाएं।
अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि अब तक 23 पीड़ित/पीड़ित परिवारों ने पोर्टल पर आवेदन किया है, जिनमें 21 को दस्तावेज पूर्ण करने के लिए कहा गया है।
बैठक में एसडीएम सुभाष चंद्र, डीडीपीओ मनीष मलिक, डीएसओ जोगेन्द्र सिंह, डिप्टी सीएमओ डॉ. स्वराज और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
इस खबर का मतलब क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों को वित्तीय सहारा देना है जो आवारा कुत्तों या बेसहारा पशुओं के काटने से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। अक्सर ऐसे मामलों में इलाज और इलाज के बाद की समस्याओं के कारण परिवार आर्थिक तंगी का शिकार हो जाते हैं। दयालु-2 योजना इन परिवारों को आर्थिक सहायता देकर उनकी मुश्किलों को कम करने का प्रयास करती है।
यह कदम यह संदेश भी देता है कि सरकार न केवल आपदा और दुर्घटना के समय मदद दे रही है, बल्कि छोटे-छोटे, रोजमर्रा के जोखिमों पर भी नजर रख रही है।
नागरिकों के लिए क्या बदलाव होगा?
आवारा पशुओं और कुत्तों से होने वाले मामलों में पीड़ितों को अब तुरंत राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यह योजना खास तौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो इलाज की लागत, समय-समय पर होने वाले खर्च और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से जूझते हैं।
इसके साथ ही, सरकारी तंत्र में शिकायत और सहायता की प्रक्रिया भी मजबूत होगी। प्रशासनिक स्तर पर आवारा पशुओं के मुद्दे पर जागरूकता और नियंत्रण बढ़ने की संभावना है।