कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर सवाल उठाते हुए
नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026।
दिल्ली सरकार द्वारा विधायकों की स्वास्थ्य जांच पर सरकारी धन खर्च किए जाने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि जब राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आम नागरिकों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा, तब जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य जांच कराना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की भाजपा सरकार ने 70 विधायकों की मेडिकल जांच के लिए 2 फरवरी से 14 फरवरी तक एक निजी अस्पताल में विशेष व्यवस्था की है, जहां प्रतिदिन केवल 5–6 विधायकों की जांच की जा रही है ताकि उन्हें इंतजार न करना पड़े। इसके उलट, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को केवल ओपीडी पंजीकरण के लिए ही घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता, लेब टेस्ट में देरी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव आम बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी दावों के विपरीत, जमीनी स्तर पर मरीजों को या तो निजी अस्पतालों की ओर धकेला जा रहा है या फिर अधूरा इलाज कर वापस भेज दिया जाता है।
देवेंद्र यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस को विधायकों की स्वास्थ्य जांच से आपत्ति नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या आम जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी अस्पतालों में इलाज की हालत खराब हो, तब सरकारी पैसे से निजी अस्पतालों में विशेष जांच कराना असंतुलित और असंवेदनशील निर्णय है।
आयुष्मान भारत योजना पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने आयुष्मान कार्ड योजना को लेकर भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, दिल्ली में यह योजना गरीबों के लिए इलाज से ज्यादा वोट हासिल करने का माध्यम बन गई है। कई बड़े निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि सरकार समय पर भुगतान नहीं करती और तय दरों का पालन नहीं होता।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मरीजों को आयुष्मान कार्ड के तहत भर्ती किया भी जाता है, उनका आधा-अधूरा इलाज कर जल्द छुट्टी दे दी जाती है। सभी दस्तावेजों पर मरीज के हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं, जबकि अस्पताल पूरा भुगतान वसूल लेते हैं। देवेंद्र यादव ने इसे सरकारी अधिकारियों और निजी अस्पतालों की मिलीभगत से चल रहा भ्रष्टाचार बताया।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया
देवेंद्र यादव ने विधानसभा अध्यक्ष के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि जनप्रतिनिधि यदि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तभी वे जनता की बेहतर सेवा कर सकेंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह तर्क तब तक अधूरा है, जब तक आम नागरिकों के स्वास्थ्य की भी समान चिंता न की जाए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदूषण, गंदगी और संक्रमण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में सरकार को विधायकों की तरह आम लोगों के लिए भी व्यापक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करनी चाहिए।
हर विधानसभा में स्वास्थ्य जांच शिविर की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि दिल्ली सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए। ये शिविर विशेष रूप से गरीब, वंचित, मजदूर और असहाय वर्ग के लिए होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अनधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास कॉलोनियों, जेजे कॉलोनियों और झुग्गी क्लस्टरों में नियमित स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जाएं, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सकें।
देवेंद्र यादव ने कहा कि अगर सरकार सच में जनहितैषी है, तो उसे प्राथमिकता बदलनी होगी। केवल जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं पर ध्यान देना और आम जनता को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।