फरीदाबाद पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई
फरीदाबाद में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच पुलिस ने एक सख्त और निर्णायक कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। बीते एक सप्ताह के भीतर साइबर ठगी से जुड़े मामलों में त्वरित जांच और समन्वित अभियान के तहत बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों को लेकर आम जनता में चिंता बढ़ रही है। फरीदाबाद साइबर अपराध गिरफ्तारी अभियान को पुलिस प्रशासन की सक्रिय रणनीति का अहम उदाहरण माना जा रहा है।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता के निर्देशन में फरीदाबाद पुलिस के साइबर थानों को विशेष निर्देश दिए गए थे कि लंबित शिकायतों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और सक्रिय ठग गिरोहों पर सीधी कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में 31 जनवरी से 06 फरवरी के बीच एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया गया।
इस अभियान का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं था, बल्कि ठगी की रकम की बरामदगी, पीड़ितों को राहत और भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम भी था।
एक सप्ताह में दर्जनों गिरफ्तारियां
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, इस अवधि में कुल 8 अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई। इन मामलों में फरीदाबाद के विभिन्न साइबर थानों की टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया।
साइबर थाना एनआईटी से 3, सेंट्रल साइबर थाना से 4 और बल्लभगढ़ साइबर थाना से 1 मामला शामिल रहा।
इन सभी मामलों में कुल 31 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं, जो अलग-अलग तरीकों से ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहे थे।
बरामदगी और वित्तीय कार्रवाई
फरीदाबाद साइबर अपराध गिरफ्तारी अभियान के दौरान पुलिस ने ₹28,45,000 की नकद व डिजिटल राशि बरामद की है। यह राशि विभिन्न पीड़ितों से ठगी के माध्यम से हासिल की गई थी।
इसके साथ ही 525 से अधिक साइबर शिकायतों का समाधान किया गया। जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों में मौजूद ₹6,58,690 की राशि को समय रहते फ्रीज कर दिया गया, जिससे पीड़ितों को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सका।
गिरफ्तार आरोपियों की विस्तृत जानकारी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अमित कुमार मीणा, सुनीता सिंघल, अभिषेक शर्मा, हसन, प्रज्ञवाल, रियास, रॉकी, दीपक, अमित, मोहम्मद अफजल, मुफीस, राजन कुमार, आकाश महादेव, अरुण राजपूत, नरेंद्र कुमार, देवेश शर्मा, शिवम, किशन, भरत कुशवाह, अमनराज, मोहम्मद अर्श, मोहम्मद तासिफ, हासिम, रोहित चौहान, विकास गोसाई, दीपक डांगी, तनकला शिवा, विक्की, मनोरंजन, सचिन कौशिक और सक्षम शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, ये आरोपी अलग-अलग राज्यों और नेटवर्क से जुड़े हुए थे और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बना रहे थे।
साइबर ठगी के बढ़ते तरीके और पुलिस की रणनीति
हाल के वर्षों में साइबर अपराध के तरीकों में लगातार बदलाव देखा गया है। फर्जी केवाईसी अपडेट, ओटीपी मांगना, नकली निवेश स्कीम, सोशल मीडिया प्रोफाइल हैकिंग और डिजिटल लोन ऐप्स के जरिए ठगी आम होती जा रही है।
फरीदाबाद पुलिस ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल ट्रेल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। इसी रणनीति के चलते फरीदाबाद साइबर अपराध गिरफ्तारी अभियान को प्रभावी माना जा रहा है।
आमजन से पुलिस की अपील
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। लालच या डर में आकर व्यक्तिगत जानकारी साझा करना साइबर ठगी का सबसे बड़ा कारण बनता है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो बिना देरी किए तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना भी आवश्यक है, ताकि समय रहते खाते फ्रीज किए जा सकें।
डिजिटल जागरूकता पर जोर
पुलिस प्रशासन का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से ही साइबर अपराध नहीं रुकेंगे। इसके लिए डिजिटल साक्षरता और जागरूकता बेहद जरूरी है। स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है।
इस खबर का असर क्या होगा?
फरीदाबाद साइबर अपराध गिरफ्तारी अभियान से स्पष्ट संदेश गया है कि डिजिटल अपराध करने वालों के लिए अब बचना आसान नहीं होगा। इस कार्रवाई से न केवल ठगों का नेटवर्क कमजोर हुआ है, बल्कि आम लोगों का पुलिस और साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ा है।
समय पर शिकायत दर्ज कराने से रकम बचाई जा सकती है—यह बात इस अभियान से साबित हुई है।
निष्कर्ष
फरीदाबाद पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत और संगठित प्रयास को दर्शाती है। फरीदाबाद साइबर अपराध गिरफ्तारी से यह साफ है कि तकनीक का सही इस्तेमाल कर अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। अब जरूरत है कि नागरिक भी सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।