फरीदाबाद एक्सटॉर्शन मामला में बरामदगी के दौरान हुई मुठभेड़ के बाद सक्रिय पुलिस।
फरीदाबाद में हाल ही में सामने आया फरीदाबाद एक्सटॉर्शन मामला पुलिस और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। रंगदारी मांगने और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े इस प्रकरण में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब बरामदगी के दौरान हुई मुठभेड़ ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
पुलिस के अनुसार, एक्सटॉर्शन से जुड़े इस नेटवर्क की जांच के दौरान एक आरोपी ने भागने की कोशिश में पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में आरोपी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
फरीदाबाद एक्सटॉर्शन मामला: जांच और गिरफ्तारी
थाना सेंट्रल क्षेत्र में दर्ज शिकायत के अनुसार, एक स्थानीय स्टील कारोबारी को विदेशी नंबर से कॉल कर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि दिसंबर 2025 में पहली बार व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से धमकी दी गई। इसके बाद फरवरी के शुरुआती दिनों में उसके घर के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं।
पांच फरवरी की रात कारोबारी के घर की गैलरी में एक थैली मिली, जिसमें कारतूस और धमकी भरा पत्र रखा था। इसके बाद मामला दर्ज कर अपराध शाखा सेक्टर-30 को जांच सौंपी गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट के आधार पर तीन युवकों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोनू गुर्जर, हनी और कपिल उर्फ कन्नू के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने कथित तौर पर अपने आकाओं के निर्देश पर धमकी भरा पत्र और कारतूस रखे थे।
बरामदगी के दौरान मुठभेड़
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। दस फरवरी को पुलिस टीम एक आरोपी को हथियारों की बरामदगी के लिए फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड स्थित पहाड़ी क्षेत्र में लेकर गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक पिस्टल और कई कारतूस बरामद कराए।
इसी दौरान आरोपी ने कथित रूप से एक पुलिसकर्मी पर मिट्टी फेंककर उसकी सरकारी पिस्टल छीन ली और भागने की कोशिश की। भागते समय उसने पुलिस टीम की दिशा में दो राउंड फायर किए। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी।
घायल आरोपी को तुरंत उपचार के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार उसकी हालत स्थिर है।
आपराधिक पृष्ठभूमि और नेटवर्क की जांच
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्य आरोपी के खिलाफ पंजाब में अपहरण, मारपीट और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले दर्ज हैं। अन्य दो आरोपियों के खिलाफ भी अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि रंगदारी की मांग के पीछे कौन लोग हैं और क्या कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। विदेशी नंबर से आई कॉल और स्थानीय स्तर पर की गई गतिविधियों के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर और तकनीकी टीम भी इस मामले में सहयोग कर रही है ताकि कॉल के स्रोत और संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
व्यापारियों में चिंता, सुरक्षा बढ़ी
घटना के बाद शहर के व्यापारिक वर्ग में चिंता देखी जा रही है। व्यापार संगठनों ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि संवेदनशील इलाकों में गश्त तेज की गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से रंगदारी मांगने के मामलों में तेजी आई है। ऐसे मामलों में त्वरित शिकायत और तकनीकी जांच बेहद अहम होती है।
इस खबर का असर क्या होगा?
फरीदाबाद एक्सटॉर्शन मामला शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है। मुठभेड़ के बाद यह संदेश गया है कि पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है।
साथ ही, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए यह सतर्क रहने का संकेत भी है। संदिग्ध कॉल, संदेश या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देना आवश्यक है। इस मामले ने साइबर सुरक्षा और स्थानीय निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत को भी रेखांकित किया है।
निष्कर्ष
फरीदाबाद एक्सटॉर्शन मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि संगठित अपराध की संभावनाओं की ओर इशारा करता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपियों को पकड़ लिया गया और मुठभेड़ में स्थिति नियंत्रित की गई। आगे की जांच से पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।