फरीदाबाद : में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शेयर मार्केट में निवेश का लालच देकर एक व्यक्ति से करीब 47.75 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने कार्रवाई करते हुए मामले में एक खाताधारक को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया गया था और इस मामले में आगे की जांच जारी है।

Image Source : Faridabad police press Release
पुलिस के अनुसार पीड़ित सेक्टर-88 का निवासी है, जिसने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि वह “यस सिक्योरिटी” नाम के एक कथित निवेश प्लेटफॉर्म के संपर्क में आया था, जिसके माध्यम से उसे शेयर मार्केट में अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया गया।
पुलिस ने कैसे पकड़ा आरोपी
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे खाते का पता चला जिसमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।जांच के आधार पर पुलिस ने खाताधारक जितिन चौधरी को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान पूर्वी दिल्ली के गांव कोंडली निवासी जितिन चौधरी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी के खाते का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम को निकालने या आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया था।
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है ताकि मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
पूछताछ में क्या खुलासा हुआ
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी जितिन चौधरी का बैंक खाता पहले से गिरफ्तार किए गए आरोपी मन्तोष के साथ ज्वाइंट खाता था। इसी खाते में ठगी की लगभग 10 लाख रुपये की रकम आई थी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और ठगी की पूरी रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। पुलिस का मानना है कि यह मामला एक संगठित साइबर ठगी गिरोह से जुड़ा हो सकता है जो निवेश के नाम पर लोगों को निशाना बनाता है।
साइबर टीम अब डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की मदद से नेटवर्क को ट्रेस कर रही है ताकि अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा सके।
ठगी का तरीका क्या था
पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि वह व्हाट्सएप के माध्यम से “यस सिक्योरिटी” नामक निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़ा था। प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों ने उसे इंट्रा-डे ट्रेडिंग, स्टॉक्स और आईपीओ में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।शुरुआत में उसे निवेश के बारे में कई तरह की जानकारी और लाभ के दावे किए गए। इन बातों से प्रभावित होकर उसने अलग-अलग चरणों में कुल 47.75 लाख रुपये निवेश कर दिए।
कुछ समय बाद जब पीड़ित ने निवेश से संबंधित जानकारी या पैसे वापस लेने की कोशिश की तो ठगों ने कॉल और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।
इस खबर का असर क्या होगा?
इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि साइबर ठग अब निवेश और शेयर मार्केट के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई से ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्ती का संदेश जाएगा।साथ ही यह घटना निवेश करने वाले लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें और अनजान लोगों के झांसे में आने से बचें।
निष्कर्ष
फिलहाल साइबर थाना सेंट्रल की टीम मामले की गहन जांच कर रही है और पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों और नेटवर्क के बारे में भी अहम जानकारी सामने आएगी।