गन्नौर में एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा करते उपमंडल अधिकारी और शिक्षा अधिकारी
सोनीपत जिले के गन्नौर उपमंडल में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने सक्रिय पहल की है। एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा के लिए उपमंडल अधिकारी प्रवेश कादियान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
बैठक का उद्देश्य फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के लक्ष्यों की प्रगति का आकलन करना और शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक कक्षाओं में पठन, लेखन और गणना कौशल को मजबूत करना प्राथमिकता है।
अधिगम स्तर पर विस्तृत चर्चा
बैठक में बीईओ, एबीआरसी और बीआरपी के साथ विभिन्न विद्यालयों से प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा की गई। विद्यार्थियों को उनके सीखने के स्तर के आधार पर वर्गीकृत करने पर जोर दिया गया, ताकि लक्ष्यित शिक्षण रणनीतियां लागू की जा सकें।अधिकारियों ने कहा कि सीखने में अंतर को पहचानना और उसे दूर करना ही एफएलएन कार्यक्रम की सफलता का मूल आधार है। इसके लिए कक्षा स्तर पर नियमित मूल्यांकन और सुधारात्मक शिक्षण आवश्यक है।
एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा में टीएलएम पर जोर
बैठक के दौरान शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के प्रभावी उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। निर्देश दिए गए कि कक्षाओं में टीएलएम का नियमित और रचनात्मक उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों को अनुभवात्मक और आनंदमय शिक्षा मिल सके।प्रशासन ने शिक्षकों को बाल-केंद्रित और नवाचारी पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण पर्याप्त नहीं है; बच्चों की जिज्ञासा और सहभागिता बढ़ाने वाली गतिविधियों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
विद्यालयों की चुनौतियों पर मंथन
समीक्षा बैठक में विद्यालय स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। अधोसंरचना, संसाधन उपलब्धता और शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना गया।
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि शैक्षिक और आधारभूत संरचना संबंधी समस्याओं के समाधान में आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए गए।
उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों की साझेदारी
खंड शिक्षा अधिकारी ने कुछ विद्यालयों द्वारा अपनाई जा रही प्रभावी शिक्षण पद्धतियों का उल्लेख किया और उन्हें अन्य स्कूलों में लागू करने का सुझाव दिया।
यह निर्णय लिया गया कि सफल प्रयोगों को साझा कर व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा, ताकि अधिगम परिणामों में समग्र सुधार लाया जा सके। प्रशासन का मानना है कि सकारात्मक उदाहरणों से प्रेरणा लेकर पूरे खंड में शैक्षिक गुणवत्ता को उन्नत किया जा सकता है।
मॉनिटरिंग और मेंटरिंग को सुदृढ़ करने के निर्देश
उपमंडल अधिकारी ने एबीआरसी और बीआरपी को नियमित विद्यालय भ्रमण और मेंटरिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें पर्याप्त नहीं हैं; जमीनी स्तर पर निरंतर निगरानी आवश्यक है।
अधिगम अंतर को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदमों की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने को कहा गया। प्रशासनिक स्तर पर यह संकेत दिया गया कि एफएलएन लक्ष्यों की प्राप्ति को गंभीरता से लिया जा रहा है।
प्रारंभिक शिक्षा में एफएलएन का महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एफएलएन को प्राथमिक शिक्षा का आधार माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कक्षा 3 तक बच्चों में बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणना कौशल विकसित नहीं होते, तो आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है।
इसी संदर्भ में एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गन्नौर में हुई यह बैठक स्थानीय स्तर पर शैक्षिक सुधार की दिशा में प्रयासों को दर्शाती है।
इस खबर का असर क्या होगा?
एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। नियमित मॉनिटरिंग और लक्ष्यित शिक्षण से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की संभावना बढ़ेगी।
यदि प्रशासनिक निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो पठन, लेखन और गणितीय कौशल में सुधार दिखाई दे सकता है। दीर्घकाल में यह पहल शैक्षिक परिणामों को मजबूत करने और ड्रॉपआउट दर कम करने में सहायक हो सकती है।
निष्कर्ष
समग्र रूप से देखा जाए तो एफएलएन कक्षाओं की समीक्षा प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। प्रशासन की सक्रियता और विद्यालयों की सहभागिता से बुनियादी शिक्षा के स्तर में सुधार संभव है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है।