मंत्री द्वारा गर्मी में पेयजल आपूर्ति तैयारी पर अधिकारियों के साथ बैठक
राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित जल संकट को देखते हुए गर्मी में पेयजल आपूर्ति तैयारी को लेकर सरकार ने सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आगामी गर्मी के मौसम में नागरिकों को निर्बाध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र में पानी की कमी की शिकायत नहीं आनी चाहिए और इसके लिए अभी से समुचित योजना, निगरानी और संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
पेयजल व्यवस्था को लेकर सतर्कता के निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली की समीक्षा की जाए। विशेष रूप से उन इलाकों की पहचान की जाए जहां हर वर्ष गर्मियों में पानी की समस्या सामने आती है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जलघरों की सफाई, टंकियों की नियमित धुलाई और पाइपलाइन की जांच समयबद्ध तरीके से की जाए। जलापूर्ति प्रणाली में किसी प्रकार की तकनीकी खामी या लीकेज को तत्काल ठीक किया जाए ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और जलघर पर फोकस
बैठक के दौरान सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और अन्य जन स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की गई। मंत्री ने साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्लांटों की नियमित निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही पर जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्रोत से लेकर आपूर्ति तक हर स्तर पर निगरानी जरूरी है।
गर्मियों में बढ़ती मांग की चुनौती
हर वर्ष मई और जून के महीनों में तापमान बढ़ने के साथ ही पानी की मांग भी बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में भूमिगत जल स्तर में गिरावट और सीमित जल संसाधनों के कारण दबाव और बढ़ जाता है।
ऐसे में विभागीय तैयारियों की समय रहते समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल वितरण नेटवर्क, मोटर पंप, फिल्ट्रेशन यूनिट और टंकियों का रखरखाव समय पर किया जाए तो आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम हो जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष निगरानी
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर हैंडपंप, ट्यूबवेल और छोटे जलघर प्रमुख स्रोत होते हैं। मंत्री ने निर्देश दिए कि खराब पड़े हैंडपंपों की सूची तैयार कर शीघ्र मरम्मत कराई जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता की जांच पर भी बल दिया गया। विभागीय अधिकारियों को कहा गया कि जल नमूनों की नियमित जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाए ताकि किसी भी प्रकार की जलजनित बीमारी की आशंका को रोका जा सके।
शहरी इलाकों में लीकेज और ओवरफ्लो पर नियंत्रण
शहरी क्षेत्रों में अक्सर पाइपलाइन लीकेज और ओवरफ्लो की समस्या से पानी की बड़ी मात्रा व्यर्थ चली जाती है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शिकायत निवारण तंत्र को सक्रिय रखा जाए और नागरिकों से प्राप्त शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। डिजिटल मॉनिटरिंग और फील्ड निरीक्षण के माध्यम से जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
विभागीय जवाबदेही तय करने के संकेत
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गर्मी के मौसम में यदि किसी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न होता है और समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने विभागीय टीमों को क्षेत्रीय दौरे बढ़ाने और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।
गर्मी में पेयजल आपूर्ति तैयारी: दीर्घकालिक सोच की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौसमी तैयारी पर्याप्त नहीं है। दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीति, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण अभियानों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
सरकार द्वारा दिए गए ताजा निर्देशों को इसी दिशा में एक प्रारंभिक कदम माना जा रहा है। यदि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले महीनों में संभावित जल संकट से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
इस खबर का असर क्या होगा?
गर्मी में पेयजल आपूर्ति तैयारी को लेकर दिए गए निर्देशों से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सकता है। समय रहते रखरखाव और निगरानी से जल आपूर्ति बाधित होने की संभावना कम होगी।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यदि जल स्रोतों की सफाई और गुणवत्ता जांच नियमित रूप से होती है, तो जलजनित बीमारियों पर भी नियंत्रण संभव है। साथ ही, विभागीय जवाबदेही तय होने से प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है।
दीर्घकाल में यह पहल जल प्रबंधन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती है और नागरिकों में भी जल संरक्षण को लेकर जागरूकता उत्पन्न कर सकती है।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि गर्मी में पेयजल आपूर्ति तैयारी केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। यदि विभागीय निर्देशों का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन होता है, तो आगामी गर्मियों में जल संकट की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।