गोहाना समाधान शिविर के दौरान नागरिकों की समस्याएं सुनते उपायुक्त।
गोहाना समाधान शिविर में गुरुवार को प्रशासनिक सक्रियता का स्पष्ट संदेश देखने को मिला, जब उपायुक्त सुशील सारवान स्वयं उपमंडल स्तरीय शिविर में पहुंचे और नागरिकों की शिकायतें सुनीं। इस पहल का उद्देश्य लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था।
शिविर के दौरान कुल 33 शिकायतों पर सुनवाई की गई, जिनमें से अधिकांश का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों को समयसीमा तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
गोहाना समाधान शिविर में प्रशासनिक सख्ती
गोहाना समाधान शिविर में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी भी विभागीय स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय के भीतर हल किया जाए। यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि समाधान शिविर केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मंच है। यहां आने वाली प्रत्येक शिकायत को दर्ज कर उसकी मॉनिटरिंग की जाती है।
पेयजल, सड़क और कब्जे के मामलों पर त्वरित निर्देश
शिविर में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी बुनियादी समस्याएं प्रमुखता से सामने आईं। पेयजल आपूर्ति, पंचायती भूमि पर अवैध कब्जा, इंतकाल संबंधी लंबित प्रकरण, टूटी सड़कों का निर्माण और बिजली के खंभों की स्थिति जैसे मुद्दों पर उपायुक्त ने मौके पर ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए।
एक मामले में गली के बीच लगे बिजली के खंभे को हटाने के लिए बिजली निगम को 72 घंटे की समयसीमा तय की गई। वहीं, सड़क निर्माण में देरी की शिकायत पर ठेकेदार से सीधे बातचीत कर कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया।
अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी एक याचिका पर भी तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि शिविर में केवल सामूहिक समस्याएं ही नहीं, व्यक्तिगत प्रशासनिक मामलों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
अवैध कब्जों और विकास कार्यों की जांच
गोहाना समाधान शिविर के दौरान कई गांवों में पंचायती भूमि पर कथित अवैध कब्जों और विकास कार्यों की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें भी सामने आईं। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जांच के आदेश दिए और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
पंचायती कार्यों की वैधता, भूमि से अतिक्रमण हटाने, प्लॉटों पर कब्जा दिलाने और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग की जांच जैसे मुद्दों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
नागरिकों के लिए एकीकृत सेवा मंच
समाधान शिविर की अवधारणा का उद्देश्य नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को अक्सर छोटी-छोटी समस्याओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में गोहाना समाधान शिविर प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम बना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकायत निवारण प्रणाली पारदर्शी और समयबद्ध हो, तो प्रशासन पर जनता का विश्वास मजबूत होता है। शिविरों के माध्यम से अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है।
अधिकारियों की मौजूदगी और समन्वय
शिविर में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राजस्व, पुलिस, बिजली, पंचायत और परिवहन सहित कई विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से शिकायतों पर तत्काल निर्णय संभव हो पाया। यह समन्वय भविष्य में भी ऐसी पहलों की प्रभावशीलता तय करेगा।
इस खबर का असर क्या होगा?
गोहाना समाधान शिविर जैसे आयोजनों से स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी। यदि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी समस्याओं का समाधान तेज होगा।
साथ ही, अवैध कब्जों और विकास कार्यों की जांच से पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा। दीर्घकाल में यह मॉडल अन्य उपमंडलों में भी प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का आधार बन सकता है।
निष्कर्ष
गोहाना समाधान शिविर ने यह संकेत दिया है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान को लेकर सक्रिय रुख अपना रहा है। हालांकि वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दिए गए निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से होता है। यदि निगरानी तंत्र मजबूत रहा, तो यह पहल स्थानीय शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बना सकती है।