
Image Source : DIPRO Government Of Haryana
जल संकट अब केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। ऐसे समय में जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत पलवल जिला प्रशासन ने जल संरक्षण को लेकर व्यापक कदम उठाने की घोषणा की है।उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भागीदारी करें। उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की एक-एक बूंद बचाना हम सभी का दायित्व है।
जल संचय जन भागीदारी अभियान क्या है और क्यों जरूरी है
जल संचय जन भागीदारी अभियान केंद्र सरकार की एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देना है। “कैच द रेन” थीम के साथ चल रहे प्रयासों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।हरियाणा सहित कई राज्यों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कृषि, उद्योग और घरेलू जरूरतों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वर्षा जल को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गहरा सकता है। ऐसे में यह अभियान समय की आवश्यकता के अनुरूप कदम माना जा रहा है।
पलवल में क्या कदम उठाए जा रहे हैं
पलवल जिला प्रशासन ने इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों की बैठक आयोजित की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करें।प्रशासन द्वारा जिन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:वर्षा जल संचयन संरचनाओं को बढ़ावा देना ताकि अधिक से अधिक पानी जमीन में समा सके।जिले के सभी तालाबों और जल निकायों की सूची तैयार कर उनकी जियो-टैगिंग करना, जिससे वैज्ञानिक निगरानी संभव हो सके।जल शक्ति केंद्रों की स्थापना कर जल प्रबंधन गतिविधियों को संगठित ढंग से आगे बढ़ाना।गहन वृक्षारोपण और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना ताकि समाज में जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो।
प्रशासन का संदेश और बहु-विभागीय समन्वय
उपायुक्त ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान की सतत मॉनिटरिंग की जाए और प्रगति की नियमित समीक्षा हो।बैठक में एसडीएम, जिला परिषद के अधिकारी और विभिन्न विभागों के अभियंता उपस्थित रहे। इससे संकेत मिलता है कि इसे केवल औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की दिशा में गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर पहल का महत्व
देशभर में जल संरक्षण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जल संचय जन भागीदारी अभियान इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट का समाधान केवल नीतिगत घोषणाओं से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदायों, पंचायतों और शहरी निकायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब तक नागरिक स्तर पर व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा, तब तक स्थायी सुधार मुश्किल रहेगा।
“इस खबर का असर क्या होगा?”
जल संचय जन भागीदारी अभियान का प्रभाव कई स्तरों पर पड़ सकता है।यदि वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के प्रयास प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में भूजल स्तर में सुधार देखा जा सकता है।जल निकायों की जियो-टैगिंग और सूचीकरण से उनके संरक्षण में पारदर्शिता बढ़ेगी और अतिक्रमण पर नियंत्रण लगेगा।सबसे महत्वपूर्ण यह कि समाज में जल के प्रति जिम्मेदार व्यवहार विकसित हो सकता है, जिससे दीर्घकालिक जल स्थिरता सुनिश्चित होगी।हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नागरिक और प्रशासन मिलकर इसे कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।
निष्कर्ष
जल संचय जन भागीदारी अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संकट से निपटने की सामूहिक पहल है। पलवल में शुरू किए गए प्रयास यदि निरंतरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते हैं, तो यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। अंततः जल संरक्षण तभी सफल होगा जब हर नागरिक इसे अपनी प्राथमिकता बनाए।