सोनीपत में आयोजित कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुति।
सोनीपत में कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम सोनीपत का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार को किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत “मेरा युवा भारत” पहल के तहत आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के युवाओं को आपस में जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करना है।
एसएम हिन्दू सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में कश्मीर घाटी से आए युवाओं ने सक्रिय भागीदारी की। उद्घाटन अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने इस पहल को देश की सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम का पृष्ठभूमि और उद्देश्य
कश्मीर घाटी और देश के अन्य हिस्सों के बीच आपसी संवाद और समझ को बढ़ाने के लिए युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को लंबे समय से प्रभावी माध्यम माना जाता रहा है। कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम सोनीपत इसी सोच का विस्तार है, जिसका उद्देश्य युवाओं को विविध संस्कृतियों, परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराना है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागी युवा न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समझते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक होते हैं।
मुख्य अतिथि ने बताया कार्यक्रम का महत्व
कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि शुगर मिल सोनीपत के प्रबंध निदेशक संजय कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम कश्मीर और अन्य राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और सांस्कृतिक दूरी को कम करते हैं। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आह्वान किया कि वे इस अनुभव से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में सकारात्मक सोच का संदेश फैलाएं।
कश्मीर से आए युवाओं की भागीदारी
इस कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम सोनीपत में कश्मीर के सीमावर्ती और प्रमुख जिलों—अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामूला, बडगाम, श्रीनगर और पुलवामा—से 120 युवा और 12 ग्रुप लीडर भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम 14 फरवरी तक चलेगा, जिसमें प्रतिभागियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और संवाद आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी परंपराओं और सभ्यता का परिचय दिया, जिससे स्थानीय लोगों को कश्मीर की समृद्ध संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिला।
प्रशासन और आयोजकों की भूमिका
जिला युवा अधिकारी बृजेश कौशिक ने बताया कि यह कार्यक्रम कश्मीर घाटी के युवाओं को देश की विविधता, विकास प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों से सीधे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं के बीच आपसी समझ और विश्वास मजबूत होता है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए संवाद सत्र, शैक्षणिक भ्रमण और जागरूकता गतिविधियों की योजना बनाई गई है, ताकि वे देश की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को बेहतर ढंग से समझ सकें।
शैक्षणिक और वैचारिक सत्र
कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं के लिए विभिन्न विषयक सत्रों का आयोजन किया गया। हिंदू कॉलेज के सहायक प्रोफेसर राजीव वत्स ने देशभक्ति, राष्ट्र निर्माण और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष पर एक विशेष सेमिनार आयोजित किया। इसमें युवाओं ने अपने विचार साझा किए और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर चर्चा की।
इसके बाद कश्मीर घाटी से जुड़े समसामयिक मुद्दों और युवाओं की भूमिका पर संवाद सत्र आयोजित किया गया। साथ ही विभाजनकारी शक्तियों से उत्पन्न चुनौतियों और खतरों पर भी चर्चा की गई, जिससे प्रतिभागियों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की गहरी समझ मिली।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बढ़ा उत्साह
पूर्व प्राचार्या संतोष राठी द्वारा प्रस्तुत हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम ने कश्मीरी युवाओं में विशेष उत्साह भर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दोनों क्षेत्रों की परंपराओं और लोक कला का आदान-प्रदान हुआ, जिसने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भ्रमण
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी युवाओं ने ख्वाजा खिजर मकबरा और स्वर्णप्रस्थ संग्रहालय का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें सोनीपत क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर एसीपी अजीत सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह मनोचा, प्रवीण वर्मा, प्रो. सुभाष सिसोदिया सहित शिक्षाविद् और कलाकार भी उपस्थित रहे, जिन्होंने युवाओं से संवाद किया।