वार्षिकोत्सव में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने छात्रों को खेल और शिक्षा का संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया
राई स्थित एमएनएसएस के वार्षिकोत्सव में दिया प्रेरक संदेश
हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित मोतीलाल नेहरू खेल विद्यालय (एमएनएसएस), राई में आयोजित 53वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में स्थायी और सार्थक सफलता के लिए खेल और शिक्षा दोनों का संतुलन अत्यंत आवश्यक है। केवल पढ़ाई या केवल खेल, किसी एक पर निर्भर रहना छात्रों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सोचने की दिशा और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है, जबकि खेल उसे आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व जैसे गुण सिखाते हैं। जब ये दोनों एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी व्यक्तित्व का पूर्ण विकास संभव होता है।
खेल: व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम
अपने भाषण में मनोहर लाल ने खेलों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक गतिविधि नहीं हैं, बल्कि जीवन की तैयारी का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मैदान में खेलते हुए छात्र हार-जीत को स्वीकार करना, टीम के साथ मिलकर काम करना और दबाव में निर्णय लेना सीखते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि खेलों के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास पैदा होता है, जो आगे चलकर पढ़ाई, करियर और सामाजिक जीवन में काम आता है। नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन और अनुशासन जैसे गुण खेल से स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं, जिन्हें किसी किताब से नहीं सिखाया जा सकता।
शिक्षा: जीवन को दिशा देने वाली आधारशिला
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि खेल जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही आवश्यक शिक्षा भी है। शिक्षा व्यक्ति को समाज, देश और विश्व को समझने की क्षमता देती है। यह न केवल रोजगार के अवसर खोलती है, बल्कि व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक भी बनाती है।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि खेल में आगे बढ़ने के साथ-साथ पढ़ाई को भी समान महत्व दें। विशेष रूप से खिलाड़ियों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने खेल करियर के बाद के जीवन के लिए भी तैयार रहें। शिक्षा इस सुरक्षा और स्थिरता की गारंटी देती है।
हरियाणा: खेलों की धरती के रूप में पहचान
मनोहर लाल ने अपने संबोधन में हरियाणा को खेलों की धरती बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। कुश्ती, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, शूटिंग और हॉकी जैसे खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार उत्कृष्ट रहा है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत प्रतिभा का परिणाम नहीं हैं, बल्कि राज्य में विकसित खेल संस्कृति, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और संस्थानों का भी योगदान है। मोतीलाल नेहरू खेल विद्यालय जैसे संस्थान इस परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
नशे से दूर रहने का सख्त संदेश
युवाओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने नशे के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नशा न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि युवाओं के सपनों और भविष्य को भी बर्बाद कर देता है।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नशे और गलत संगत से दूर रहें और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। परिश्रम, धैर्य और सकारात्मक सोच को उन्होंने सफलता का मूल मंत्र बताया। उनके अनुसार, खेल और शिक्षा दोनों ही युवाओं को ऊर्जा और सही दिशा प्रदान करते हैं, जिससे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहा जा सकता है।
वार्षिकोत्सव में छात्रों का सम्मान
53वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यालय के कई छात्रों और हाउसों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में बेहतर उपलब्धि हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे सम्मान छात्रों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की भी सराहना की, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी को ‘खेल की आईआईटी’ बनाने का लक्ष्य
इस अवसर पर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी को ‘खेल की आईआईटी’ बनाने के संकल्प को भी दोहराया गया। मनोहर लाल ने कहा कि भारत को ऐसे विश्वस्तरीय खेल शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता है, जहां आधुनिक तकनीक, शोध और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने बताया कि ऐसी यूनिवर्सिटी केवल उत्कृष्ट खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षक, खेल वैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट और खेल प्रशासक भी तैयार करेगी। इससे देश की खेल प्रणाली को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।