
Image Source : Faridabad Police press Release
फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र स्थित महिला पुलिस थाने में लंबे समय से जलभराव की समस्या प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई थी। अब महिला पुलिस थाना NIT वर्षा जल संचयन मॉडल के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने का प्रयास किया गया है।भारी बारिश के दौरान परिसर में पानी जमा होने से न केवल कामकाज प्रभावित होता था, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी चिंताएँ भी बढ़ जाती थीं। ऐसे में एक दीर्घकालिक और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी।
जलभराव से जल-सुरक्षा तक का सफर
इस परियोजना के तहत थाने के परिसर में प्रकृति-आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की गई है। इसका उद्देश्य केवल पानी निकालना नहीं, बल्कि उसे संरक्षित और पुनर्भरण करना भी है।परियोजना के अंतर्गत एक समेकित ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें वर्षा जल को एकत्रित कर फिल्टर किया जाता है और फिर भू-जल में पुनर्भरण किया जाता है। इससे जलभराव की मूल समस्या को कम करने के साथ-साथ भूमिगत जल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।तकनीकी संरचना में सेडिमेंटेशन-फिल्ट्रेशन टैंक, गली ट्रैप, लंबी जल निकासी नाली और बायोरिटेंशन सेल शामिल हैं। बायोरिटेंशन सेल में विशेष प्रकार की मिट्टी और ऐसे पौधे लगाए गए हैं जो प्रदूषकों को अवशोषित करने में सक्षम हैं।
इसके अतिरिक्त रिचार्ज पिट और रिचार्ज कुओं का निर्माण किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लाखों लीटर पानी को जमीन में वापस पहुंचाने की क्षमता विकसित हुई है।
महिला पुलिस थाना NIT वर्षा जल संचयन मॉडल का उद्घाटन
इस संरचना का उद्घाटन एक विशेष समारोह में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रशासनिक, शैक्षणिक और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने इस पहल को शहरी जल प्रबंधन की दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल बताया। उनका कहना था कि इस तरह के समाधान सार्वजनिक संस्थानों में अपनाए जा सकते हैं, जिससे जल संकट और शहरी बाढ़ की समस्या को कम किया जा सके।कार्यक्रम में तकनीकी प्रस्तुति, साइट निरीक्षण और पैनल चर्चा का आयोजन भी किया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन और संस्थागत सहयोग की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ।

Image Source : Faridabad Police press Release
पृष्ठभूमि: शहरी बाढ़ और बढ़ती चुनौती
तेजी से शहरीकरण के कारण शहरों में प्राकृतिक जल निकासी तंत्र प्रभावित हुआ है। पक्के निर्माण और कम हरित क्षेत्र के चलते बारिश का पानी जमीन में समाने के बजाय सड़कों और परिसरों में जमा हो जाता है।फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहर में यह समस्या कई सार्वजनिक भवनों में देखी जाती रही है। महिला पुलिस थाने में भी जलभराव के कारण नियमित कार्यों में बाधा आती थी।ऐसे में वर्षा जल संचयन जैसी प्रकृति-आधारित तकनीक को अपनाना एक दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम माना जा रहा है।
संस्थागत सहयोग की भूमिका
इस परियोजना को एक गैर-लाभकारी संस्था और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत विकसित किया गया। संबंधित संस्थाओं का कहना है कि जल सुरक्षा को बढ़ावा देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय है।उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि यह मॉडल अन्य सार्वजनिक संस्थानों, विशेषकर स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में भी लागू किया जा सकता है।पुलिस अधिकारियों ने भी इस ढांचे को परिचालन की दृष्टि से उपयोगी बताया। उनका मानना है कि इससे परिसर में स्वच्छता और कार्यकुशलता में सुधार होगा।
पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
महिला पुलिस थाना NIT वर्षा जल संचयन मॉडल के माध्यम से जलभराव में कमी आने के साथ-साथ भू-जल स्तर में सुधार की संभावना है।साथ ही, यह परियोजना शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी करेगी। स्कूल के विद्यार्थियों और समुदाय के सदस्यों की भागीदारी से यह पहल एक शैक्षिक उदाहरण के रूप में भी उभर सकती है।इस प्रकार, यह केवल अवसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी की दिशा में उठाया गया कदम है।
निष्कर्ष
शहरों में जल संकट और बाढ़ की समस्या बढ़ती चिंता का विषय है। ऐसे समय में महिला पुलिस थाना NIT वर्षा जल संचयन मॉडल जैसी पहलें व्यवहारिक और पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रस्तुत करती हैं।हालांकि, इन मॉडलों की सफलता उनके नियमित रखरखाव और सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर करेगी। यदि यह पहल प्रभावी साबित होती है, तो यह शहरी संस्थानों के लिए एक मार्गदर्शक उदाहरण बन सकती है।