मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया को लेकर हरियाणा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। सोनीपत के गोहाना में आयोजित एक संगठनात्मक बैठक के दौरान सहकारिता, कारागार, निर्वाचन, विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने इस विषय को प्राथमिकता बताते हुए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सटीक और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती का आधार होती है। ऐसे में केवल चुनाव आयोग या सीमित पदाधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर कार्यकर्ता को इस प्रक्रिया में योगदान देना चाहिए।
कार्यकर्ताओं की भूमिका क्यों है अहम
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार चुनाव के समय कार्यकर्ता बूथ स्तर पर सक्रिय रहते हैं, उसी तरह मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान भी सजगता जरूरी है।उन्होंने कहा कि सूची में किसी भी मतदाता का नाम दो स्थानों पर नहीं होना चाहिए। साथ ही, मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थान परिवर्तन करने वालों के विवरण को अपडेट करना और 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को जोड़ना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया: एसआईआर का महत्व
मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया के तहत स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को एक अहम चरण माना जा रहा है। मंत्री ने बताया कि 19 फरवरी को देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया को लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हरियाणा में करीब 24 वर्षों बाद इस तरह का व्यापक पुनरीक्षण हो रहा है। वर्तमान में प्री-एसआईआर के तहत वर्ष 2002 की मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2025 की सूची से किया जा रहा है, जिसमें अब तक लगभग 65 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
बूथ स्तर पर तैयारियां
सरकार और संगठन की ओर से इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर तक जिम्मेदारियां तय की गई हैं। विधानसभा स्तर पर प्रभारी नियुक्त किए जा चुके हैं, जबकि बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति अंतिम चरण में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए।
विपक्ष पर दोहरे मापदंड के आरोप
बैठक के दौरान डॉ अरविंद शर्मा ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए मतदाता सूची और ईवीएम जैसे मुद्दों को उठाता है।
उन्होंने कहा कि जब चुनाव परिणाम अनुकूल होते हैं, तब इन प्रणालियों पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता, लेकिन हार के बाद इन्हीं पर संदेह जताया जाता है। मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों में ईवीएम को लेकर ठोस सुझाव देने के बजाय केवल आरोप लगाए गए हैं, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
संगठनात्मक बैठक और रैली की तैयारी
गोहाना में आयोजित इस बैठक में पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान आगामी रैली की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया में भी पूरी जिम्मेदारी निभाएं।
लोकतंत्र और पारदर्शिता पर प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। यदि सूची में त्रुटियां होती हैं, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय-समय पर इस प्रकार की प्रक्रियाएं जरूरी होती हैं, ताकि सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार मिल सके और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
निष्कर्ष: मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया की अहमियत
मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। डॉ अरविंद शर्मा के बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस दिशा में सक्रिय है और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को आवश्यक मानती है। यदि इस प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेगा।