हरियाणा सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कम भूमि में अधिक उत्पादन के लक्ष्य के साथ मेडिसिनल पौधों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसानों को औषधीय और एरोमैटिक पौधों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

Image : DIPR, Govt. of Haryana
सरकार का मानना है कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मेडिसिनल पौधों की खेती को अपनाने से किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल सकते हैं और कृषि क्षेत्र में विविधता भी बढ़ेगी।
रिपोर्ट का विमोचन, नई नीति की तैयारी
चंडीगढ़ में आयोजित एक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण द्वारा तैयार दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों का विमोचन किया। इनमें से एक रिपोर्ट प्रदेश में औषधीय और सुगंधित पौधों के प्रोत्साहन से जुड़ी है, जबकि दूसरी रिपोर्ट माइक्रो-इरिगेशन के विस्तार पर केंद्रित है।इन रिपोर्टों में किसानों को नई फसलों की ओर प्रेरित करने, बाजार उपलब्धता और तकनीकी सहायता से जुड़े सुझाव शामिल किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी बनाना और पानी के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
माइक्रो-इरिगेशन पर भी जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को माइक्रो-इरिगेशन तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव है।प्रदेश के कई क्षेत्रों में जल स्तर गिरने की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा देने से जल संरक्षण के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है। सरकार इसे भविष्य की कृषि रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
खरीफ फसलों की मूल्य नीति पर भी चर्चा
बैठक में खरीफ फसलों के लिए मूल्य नीति निर्धारण से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया गया। विपणन सत्र 2026-27 को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर चर्चा की गई।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किया जाए और इसे केंद्र सरकार को भेजा जाए। इससे आने वाले मौसम में फसलों के बेहतर समर्थन मूल्य तय करने की प्रक्रिया में राज्य की भूमिका मजबूत होगी।
किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति
सरकार का मानना है कि बदलते कृषि परिदृश्य में पारंपरिक फसलों के साथ वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देना जरूरी है।
मेडिसिनल पौधों की खेती में तुलसी, अश्वगंधा, लेमनग्रास, पुदीना और अन्य औषधीय पौधे शामिल हैं, जिनकी मांग फार्मास्यूटिकल, आयुर्वेद और कॉस्मेटिक उद्योगों में लगातार बढ़ रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन फसलों के लिए कम भूमि और अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे छोटे किसानों के लिए भी यह एक लाभकारी विकल्प बन सकता है।
निष्कर्ष
कृषि क्षेत्र में नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में हरियाणा सरकार की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो मेडिसिनल पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने में अहम योगदान दे सकती है।