मुख्यमंत्री खेत-खलिहान योजना के तहत पक्का गौहर मार्ग
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प्रदेश सरकार ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने और किसानों की दैनिक समस्याओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री खेत-खलिहान योजना के तहत खेतों तक पहुंचने वाले कच्चे गौहर (खेती मार्ग) रास्तों को पक्का करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को मौसम की मार और खराब रास्तों से होने वाली परेशानियों से राहत देना है, ताकि कृषि कार्य समयबद्ध और सुचारु रूप से हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से खेतों तक पहुंच के लिए बेहतर मार्गों की मांग उठती रही है, जिसे अब नीति स्तर पर प्राथमिकता दी गई है।
योजना की रूपरेखा और कार्यान्वयन
मुख्यमंत्री खेत-खलिहान योजना के अंतर्गत एक से चार करम चौड़ाई तक के गौहर मार्गों को पक्का किया जाएगा। ये वे रास्ते हैं जिनका उपयोग किसान अपने खेतों तक ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और फसल परिवहन के लिए करते हैं। बरसात के मौसम में ये मार्ग अक्सर कीचड़ और जलभराव के कारण अनुपयोगी हो जाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक और समय संबंधी नुकसान उठाना पड़ता है।
योजना के तहत प्रत्येक विधायक को अपने विधानसभा क्षेत्र में अधिकतम 25 किलोमीटर तक ऐसे गौहर मार्गों के निर्माण या सुदृढ़ीकरण का अधिकार दिया गया है। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकता तय करने में आसानी होगी और विकास कार्यों में विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
विकास एवं पंचायत मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार ने इस योजना को किसानों की सुविधा से जुड़ा एक व्यावहारिक कदम बताया है। उनके अनुसार, यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और कृषि उत्पादन को सुगम बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी थे पक्के खेती मार्ग?
प्रदेश के कई हिस्सों में खेतों तक जाने वाले रास्ते दशकों से कच्चे रहे हैं। भारी मशीनरी के उपयोग और बढ़ते कृषि उत्पादन के साथ इन मार्गों पर दबाव भी बढ़ा है। कई बार फसल कटाई के समय ट्रॉली और ट्रैक्टर के फंस जाने से किसानों को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण को केंद्र और राज्य सरकारें विकास के प्रमुख मानकों में शामिल कर रही हैं। सड़क, सिंचाई और भंडारण के साथ-साथ खेतों तक पहुंच मार्गों की गुणवत्ता भी अब कृषि नीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है। मुख्यमंत्री खेत-खलिहान योजना इसी व्यापक सोच का परिणाम है।
स्थानीय स्तर पर निर्णय की व्यवस्था
योजना की एक खास विशेषता यह है कि विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्राथमिकता तय करने का अधिकार दिया गया है। इससे उन गांवों को पहले लाभ मिल सकेगा जहां मार्गों की स्थिति सबसे अधिक खराब है या जहां किसानों की संख्या अधिक है।
स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण समुदाय की वास्तविक जरूरतों के अनुसार कार्य चयन संभव होगा। यह व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी सरल बना सकती है।
कृषि कार्यों पर संभावित सकारात्मक प्रभाव
पक्के गौहर मार्ग बनने से खेतों तक ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरणों की आवाजाही सुगम होगी। इससे बुवाई और कटाई जैसे समयबद्ध कार्यों में देरी की संभावना कम होगी।
फसल की ढुलाई में भी समय और लागत दोनों की बचत होगी। मंडियों तक अनाज पहुंचाने में सुविधा मिलने से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
इसके अलावा, बारिश के मौसम में कीचड़ और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र आवागमन व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
कृषि क्षेत्र में छोटी-छोटी अवसंरचनात्मक सुधार भी बड़े आर्थिक परिणाम ला सकते हैं। बेहतर रास्तों से न केवल खेती कार्य प्रभावित होंगे, बल्कि ग्रामीण रोजगार और निर्माण गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है। साथ ही, पक्के मार्ग बनने से भविष्य में अन्य विकास परियोजनाओं के लिए आधारभूत ढांचा मजबूत होगा।
निष्कर्ष
ग्रामीण विकास की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल मार्ग निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि प्रणाली को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने की पहल का हिस्सा है। मुख्यमंत्री खेत-खलिहान योजना से खेतों तक पहुंच आसान होने के साथ किसानों की उत्पादकता और कार्यकुशलता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
यदि योजना का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है