संत कबीर कुटीर में मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों के साथ चर्चा करते मुख्यमंत्री।
नायब सिंह सैनी ने संत कबीर कुटीर में आयोजित मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में जिलों में सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि राज्य सरकार की नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाएं। बैठक में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सेवा वितरण की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
जिलों में सफाई और कचरा प्रबंधन पर फोकस
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की मजबूती राज्य की प्राथमिकता है। कई जिलों में कचरा उठान, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और निस्तारण प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नगर निकाय और जिला प्रशासन समन्वय के साथ कार्य करें।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है। यदि कचरा प्रबंधन तंत्र मजबूत नहीं होगा तो स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ेगा। इस संदर्भ में स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र सुदृढ़ करने और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शिकायत निवारण प्रणाली को पारदर्शी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक में शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा भी प्रमुख एजेंडा रही। राज्य स्तर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निपटारे की गति और गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा हो और समाधान में अनावश्यक देरी न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होगा तो शासन के प्रति विश्वास कमजोर होगा। इसलिए शिकायतों की ट्रैकिंग, फॉलो-अप और फीडबैक तंत्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई में समन्वित प्रयास
बैठक में सुशासन सहयोगियों की भूमिका को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई जैसे आवश्यक क्षेत्रों में उपायुक्तों के साथ मिलकर काम करें। उनका कार्य केवल निगरानी तक सीमित न रहे, बल्कि नीति क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी हो।
उन्होंने संकेत दिया कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभाव का आकलन करना और सुधार के सुझाव देना सुशासन सहयोगियों की प्रमुख जिम्मेदारी है। शिक्षा संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली और सफाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया।
प्रशासनिक क्षमता में सुधार की दिशा
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग और जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में प्रशासन को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना अनिवार्य है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जिला स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जाए। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सुशासन मॉडल को जमीनी स्तर पर लागू करने की रणनीति
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक का व्यापक संदेश यह रहा कि राज्य सरकार सुशासन के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में लागू करना चाहती है। इसके लिए डेटा-आधारित निर्णय, नियमित समीक्षा और फील्ड विजिट को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए जनता के बीच जाएं। इस प्रक्रिया से नीतियों में सुधार और सेवा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
इस खबर का असर क्या होगा?
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक के बाद जिलों में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है। सफाई और कचरा प्रबंधन प्रणाली में सुधार से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिम कम हो सकते हैं। शिकायत निवारण प्रक्रिया तेज होने से नागरिकों का भरोसा मजबूत होगा।
इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बढ़ने से बुनियादी सुविधाओं में सुधार देखने को मिल सकता है। यदि बैठक में तय दिशा-निर्देश प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह और परिणाम-केंद्रित बन सकती है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी समीक्षा बैठक ने यह संकेत दिया है कि राज्य सरकार सेवा वितरण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है। केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही सुशासन की कसौटी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक में तय की गई प्राथमिकताएँ जमीनी स्तर पर किस हद तक परिणाम देती हैं।