
Image Source : DIPRO Government Of Haryana
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने जिन विकास परियोजनाओं का उल्लेख किया, उनमें सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली पहल है नौरंगराय तालाब विकास परियोजना। लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) न केवल एक सौंदर्यीकरण योजना है, बल्कि इसे शहरी सामाजिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में व्यापक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।इसके साथ ही महावीर पार्क और बाल भवन के लिए भी नए DPR तैयार किए जा रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास की तस्वीर बदल सकते हैं।
पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी थी नौरंगराय तालाब विकास परियोजना?
हरियाणा के कई शहरों में पुराने तालाब और सार्वजनिक स्थल समय के साथ उपेक्षा का शिकार होते रहे हैं। शहरीकरण के दबाव, रखरखाव की कमी और अव्यवस्थित विकास के कारण इन स्थानों का उपयोग सीमित हो गया था।नौरंगराय तालाब भी लंबे समय से पुनर्विकास की प्रतीक्षा में था। स्थानीय निवासियों की मांग थी कि इसे केवल जलस्रोत के रूप में नहीं, बल्कि एक सामुदायिक और पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।ऐसे में नौरंगराय तालाब विकास परियोजना का नया DPR तैयार होना इस दिशा में ठोस पहल माना जा रहा है।
क्या बदलेगा? परियोजना की प्रमुख बातें
1. 17 करोड़ रुपये की नई DPR
मंत्री के अनुसार, लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से नया विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य दो वर्षों के भीतर कार्य पूर्ण करना है।
2. समयबद्ध कार्यान्वयन
परियोजना को स्पष्ट समय-सीमा के साथ आगे बढ़ाने की बात कही गई है, जिससे कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
3. सौंदर्यीकरण के साथ आधुनिक सुविधाएं
- बेहतर पैदल मार्ग
- हरित क्षेत्र का विस्तार
- बैठने और मनोरंजन की सुविधाएं
- प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंध
4. सामाजिक अवसंरचना पर फोकस
तालाब को केवल एक जल निकाय के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन का सक्रिय केंद्र बनाने की योजना है।
महावीर पार्क और बाल भवन: समानांतर विकास की दिशा
नौरंगराय तालाब विकास परियोजना के साथ-साथ महावीर पार्क के लिए भी नया DPR तैयार किया जा रहा है। पार्कों का आधुनिकीकरण शहरी जीवन गुणवत्ता से सीधा जुड़ा विषय है।
इसके अतिरिक्त, बाल भवन परियोजना के लिए लगभग 22 करोड़ रुपये का DPR तैयार हो चुका है। यह बच्चों और युवाओं के लिए शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन सकता है।
इन तीनों परियोजनाओं को एक व्यापक शहरी विकास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार का दृष्टिकोण और नेतृत्व
मंत्री विपुल गोयल ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार हर परियोजना को ठोस नीति और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह बयान केवल औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का संकेत भी है। बजट सत्र में सार्वजनिक रूप से परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा बताना पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
किसे होगा लाभ?
1. स्थानीय नागरिक
- बेहतर सार्वजनिक स्थान
- स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण
- सामाजिक मेलजोल के लिए खुला मंच
2. बच्चे और युवा
बाल भवन परियोजना के माध्यम से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
3. पर्यावरण
तालाब के संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।
4. स्थानीय अर्थव्यवस्था
सार्वजनिक स्थलों के विकास से आसपास के क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे छोटे व्यापारियों को अप्रत्यक्ष लाभ होगा।
इस खबर का असर क्या होगा?
नौरंगराय तालाब विकास परियोजना का असर बहु-आयामी हो सकता है।
- शहरी जीवन गुणवत्ता में सुधार: बेहतर सार्वजनिक स्थल नागरिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
- सामाजिक एकजुटता: पार्क और तालाब जैसे स्थान समुदाय को जोड़ने का काम करते हैं।
- संपत्ति मूल्यों में वृद्धि: विकसित अवसंरचना से आसपास के क्षेत्रों की रियल एस्टेट वैल्यू बढ़ सकती है।
- पर्यटन और स्थानीय पहचान: यदि परियोजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह क्षेत्रीय पहचान का नया प्रतीक बन सकती है।
हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कार्य समय पर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे होते हैं या नहीं।

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जनता के लिए क्या मार्गदर्शन?
- परियोजना से जुड़े अपडेट पर नजर रखें।
- स्थानीय निकाय बैठकों और जन-सुनवाई में भाग लें।
- यदि निर्माण कार्य के दौरान कोई समस्या हो, तो संबंधित विभाग को सूचित करें।
- सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में सहयोग करें।
सफल विकास केवल सरकारी प्रयास से नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता से संभव होता है।
निष्कर्ष: विकास की नई दिशा या परीक्षा की घड़ी?
नौरंगराय तालाब विकास परियोजना केवल 17 करोड़ रुपये की एक योजना नहीं है, बल्कि यह सरकार की पारदर्शी और उत्तरदायी शासन व्यवस्था की परीक्षा भी है।यदि घोषित समय-सीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य पूरे होते हैं, तो यह पहल शहरी विकास का मॉडल बन सकती है। साथ ही महावीर पार्क और बाल भवन जैसी परियोजनाएं सामाजिक अवसंरचना को नई ऊर्जा देंगी।आखिरकार, किसी भी विकास योजना की सफलता कागजों से आगे बढ़कर जमीन पर उसके प्रभाव से तय होती है। आने वाले दो वर्ष यह तय करेंगे कि नौरंगराय तालाब विकास परियोजना वास्तव में शहर की पहचान बदलने में कितनी सफल होती है।