पलवल में निराश्रितों को भोजन सेवा कार्यक्रम में भोजन ग्रहण करते जरूरतमंद
पलवल में सामाजिक सरोकार की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली, जहां निराश्रितों को भोजन सेवा के माध्यम से एक परिवार ने अपने दिवंगत सदस्य की पुण्यतिथि को सेवा दिवस के रूप में मनाया। श्री वैश्य अग्रवाल सभा, पलवल के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता और सिहौलिया परिवार ने स्वर्गीय बद्रीप्रसाद जी की 48वीं पुण्यतिथि पर जरूरतमंदों के लिए सामूहिक भोजन का आयोजन किया।नागरिक अस्पताल परिसर स्थित बाबा महाकाल की रसोई ट्रस्ट में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में सैकड़ों निराश्रितों और जरूरतमंदों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
सेवा के माध्यम से श्रद्धांजलि
परिवार की ओर से बताया गया कि पुण्यतिथि को केवल औपचारिक स्मरण तक सीमित रखने के बजाय समाजोपयोगी कार्य से जोड़ना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इसी सोच के साथ भोजन सेवा का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली के सरिता विहार निवासी सुंदरकांड के प्रवक्ता महीपत सिंह ने कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बाबा महाकाल मंदिर में प्रसाद अर्पित कर भोजन वितरण की शुरुआत की।
बाबा महाकाल की रसोई में आयोजन
नागरिक अस्पताल परिसर में संचालित बाबा महाकाल की रसोई ट्रस्ट लंबे समय से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। इसी स्थान को आयोजन के लिए चुना गया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लाभान्वित हो सकें।आयोजन के दौरान भोजन की स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई।
सामाजिक भागीदारी और प्रेरक संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज में जरूरतमंदों की सहायता करना केवल दान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। ऐसे अवसरों पर सामूहिक भागीदारी से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि जरूरतमंदों को भोजन कराना आत्मिक संतोष का माध्यम है। यह सेवा भाव न केवल दिवंगत आत्मा की स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि समाज में करुणा और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम में सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। उन्होंने परिवार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुण्यतिथि जैसे अवसरों को समाजसेवा से जोड़ना अनुकरणीय परंपरा है।स्थानीय नागरिकों ने भी आयोजन में सहयोग दिया। भोजन वितरण के दौरान अनुशासन और गरिमा बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
निराश्रितों को भोजन सेवा: परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व
भारतीय समाज में पुण्यतिथि को स्मरण और सेवा के रूप में मनाने की परंपरा रही है। समय के साथ कई परिवारों ने इसे सामाजिक सरोकार से जोड़ना शुरू किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन सामाजिक एकजुटता को मजबूत करते हैं। जब समुदाय के लोग मिलकर सेवा कार्य करते हैं, तो समाज में विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है।पलवल जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऐसे आयोजन जरूरतमंदों के लिए सहारा बनते हैं। अस्पताल परिसर में भोजन उपलब्ध होने से मरीजों के परिजन और असहाय लोग भी लाभान्वित होते हैं।
इस खबर का असर क्या होगा?
निराश्रितों को भोजन सेवा जैसे आयोजन समाज में सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हैं। इससे अन्य परिवार और संस्थाएं भी प्रेरित हो सकती हैं कि वे पारिवारिक अवसरों को सामाजिक दायित्व से जोड़ें।स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास जरूरतमंदों को तात्कालिक राहत प्रदान करते हैं और सामुदायिक सौहार्द को मजबूत करते हैं। यदि इस प्रकार की पहल निरंतर जारी रहती है, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
पुण्यतिथि को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय उसे सेवा और करुणा के साथ जोड़ना एक सार्थक पहल है। निराश्रितों को भोजन सेवा के माध्यम से श्रद्धांजलि देना सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐसे आयोजन यह संदेश देते हैं कि व्यक्तिगत स्मृति को भी सामूहिक कल्याण से जोड़ा जा सकता है।