लघु सचिवालय पलवल में बाढ़ सुरक्षा प्रस्तावों पर बैठक करते उपायुक्त और अधिकारी
पलवल, जिला पलवल को बाढ़ की समस्या से स्थायी रूप से मुक्त करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के कांफ्रेंस रूम में बाढ़ सुरक्षा प्रस्तावों को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और अब तक की गई तैयारियों की जानकारी साझा की।
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए एस्टीमेट सहित एक समग्र, व्यावहारिक और दीर्घकालिक कार्य योजना शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि ऐसे स्थायी उपाय किए जाएं जिससे आने वाले वर्षों में भी बाढ़ और जलभराव की समस्या दोबारा न उत्पन्न हो।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान पर जोर
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सबसे पहले जिले के उन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान की जाए, जो हर वर्ष बाढ़ या जलभराव से प्रभावित होते हैं। इन क्षेत्रों में नदियों, नालों, ड्रेनेज सिस्टम और निचले इलाकों का विशेष अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना सटीक आंकड़ों और जमीनी सर्वेक्षण के प्रभावी योजना बनाना संभव नहीं है।
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर पर बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट और एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि इन प्रस्तावों को समय पर उच्चाधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जा सके।
प्राथमिकता के आधार पर होंगे बाढ़ नियंत्रण कार्य
डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और तय समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्य योजना में प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की सूची और वैकल्पिक समाधान अवश्य शामिल किए जाएं, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लिया जा सके।
यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के निर्देश
बैठक में यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने पर भी विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले से किसी भी प्रकार का गंदा या बिना उपचारित पानी यमुना नदी में न जाए। इसके लिए जिले में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने हेतु उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग कृषि सिंचाई में किया जा सकता है, जिससे एक ओर जल संरक्षण होगा और दूसरी ओर किसानों को भी लाभ मिलेगा।
जलभराव और सेम की समस्या के स्थायी समाधान पर फोकस
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन गांवों और शहरी क्षेत्रों में सेम की समस्या या अन्य कारणों से लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है, वहां स्थायी समाधान के लिए विशेष प्रस्ताव तैयार किए जाएं। मोहबलीपुर और इंद्रानगर गांवों के लिंक मार्गों को पक्का करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि बारिश के मौसम में आवागमन बाधित न हो।
इसके साथ ही शहर के गंदे नालों को कवर करने संबंधी मसौदा तैयार करने को कहा गया, जिससे न केवल जल निकासी बेहतर हो, बल्कि स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार आए।
विभागीय समन्वय पर विशेष जोर
उपायुक्त ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण जैसे बड़े मुद्दे का समाधान केवल एक विभाग नहीं कर सकता। इसके लिए सिंचाई, पब्लिक हेल्थ, लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद, राजस्व और ग्रामीण विकास विभागों को मिलकर काम करना होगा। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आपसी समन्वय से कार्य करते हुए प्रस्तावों और आवश्यक लिंक को शीघ्र तैयार कर भेजें।
अधिकारियों ने रखे अपने सुझाव
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने जिला पलवल को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए अपने-अपने विभाग द्वारा तैयार की गई प्रारंभिक कार्य योजनाओं से उपायुक्त को अवगत कराया। इन योजनाओं में ड्रेनेज सुधार, नालों की सफाई, जल निकासी मार्गों का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन जैसे बिंदु शामिल रहे।
बैठक में एसडीएम पलवल ज्योति, एसडीएम होडल बलीना, एसडीएम हथीन अप्रतिम सिंह, जिला नगर आयुक्त मनीषा शर्मा, जिला राजस्व अधिकारी बलराज सिंह, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहित वशिष्ठ, पब्लिक हेल्थ विभाग और लोक निर्माण विभाग (भवन एवं मार्ग) के कार्यकारी अभियंता रितेश यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।