दूधौला ब्लॉक के बदाई गांव में आयोजित एसबीसीसी स्वास्थ्य जागरूकता बैठक
पलवल, दूधौला ब्लॉक के बदाई गांव (अल्लिका) में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जहां सोसाइटी फॉर एप्लाइड स्टडीज के तत्वावधान में एसबीसीसी (सोशल एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन) बैठक का सफल आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य गांव की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक देखभाल, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया। बैठक के दौरान महिलाओं को यह समझाया गया कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण से ही सही जानकारी और नियमित जांच कैसे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती है।
गर्भावस्था का प्रारंभिक पंजीकरण क्यों जरूरी
बैठक में बताया गया कि गर्भावस्था की पुष्टि होते ही प्रारंभिक पंजीकरण कराना बेहद आवश्यक है। इससे गर्भवती महिला को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है और स्वास्थ्य विभाग उसकी नियमित निगरानी कर पाता है। प्रारंभिक पंजीकरण से जटिलताओं की पहचान जल्दी हो सकती है, जिससे जोखिम कम होता है।
महिलाओं को यह भी बताया गया कि नियमित एएनसी (एंटीनैटल केयर) जांच के दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन और अन्य जरूरी परीक्षण किए जाते हैं, जो सुरक्षित गर्भावस्था के लिए अहम हैं।
अल्ट्रासाउंड और खतरे के लक्षणों की पहचान
स्वास्थ्य टीम ने अल्ट्रासाउंड जांच के महत्व पर विशेष जोर दिया। महिलाओं को समझाया गया कि अल्ट्रासाउंड से भ्रूण की स्थिति, विकास और संभावित समस्याओं की समय रहते जानकारी मिलती है।
इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान दिखाई देने वाले खतरे के लक्षणों जैसे अत्यधिक सूजन, तेज सिरदर्द, रक्तस्राव, पेट में असामान्य दर्द या भ्रूण की गतिविधियों में कमी के बारे में भी विस्तार से बताया गया। महिलाओं को सलाह दी गई कि ऐसे किसी भी लक्षण की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
पोषण और पूरक आहार पर फोकस
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गर्भवती महिलाओं के पोषण पर केंद्रित रहा। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने संतुलित आहार, हरी सब्जियों, फल, दाल, दूध और प्रोटीन युक्त भोजन के महत्व को समझाया।
महिलाओं को यह भी बताया गया कि आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व मां और शिशु दोनों के लिए क्यों जरूरी हैं। सही समय पर पूरक आहार लेने से एनीमिया और अन्य पोषण संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।
दवाओं के सही उपयोग पर मार्गदर्शन
पीएचसी अल्लिका के चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय ने गर्भवती महिलाओं को फोलिक एसिड, आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए), कैल्शियम और एल्बेंडाजोल के सेवन का सही समय और अवधि समझाई। उन्होंने बताया कि इन दवाओं का नियमित और सही तरीके से सेवन गर्भावस्था को सुरक्षित बनाता है।
डॉ. संजय ने गर्भावस्था से जुड़ी आम भ्रांतियों पर भी चर्चा की और महिलाओं को वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी घरेलू उपाय या दवा का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
सुरक्षित प्रसव और जन्म की तैयारी
बैठक में महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की तैयारी के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें प्रसव से पहले अस्पताल का चयन, जरूरी दस्तावेज, परिवहन व्यवस्था और परिवार के सहयोग की भूमिका पर चर्चा हुई। महिलाओं को यह भी बताया गया कि प्रसव के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी क्यों जरूरी है।
पंचायत और स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता
इस बैठक में ग्राम सरपंच कोमल, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहीं। ग्राम सरपंच कोमल ने इस तरह की जागरूकता गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि गांव की महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं। उन्होंने भविष्य में भी पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।