भारत स्काउट्स एंड गाइड्स गदपुरी में आयोजित विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम
पलवल में विधिक जागरूकता को मिला नया आयाम
पलवल जिले में युवाओं को कानूनी अधिकारों और सरकारी विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के तत्वावधान में एनएसएस के सात दिवसीय शिविर के अंतर्गत भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, गदपुरी में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नालसा-हालसा योजनाओं, निःशुल्क कानूनी सहायता और विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी देना रहा।
न्यायिक नेतृत्व में हुआ आयोजन
इस विशेष शिविर का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के चेयरपर्सन राज गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के सचिव हरीश गोयल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। न्यायिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाया।
नालसा-हालसा योजनाओं की विस्तृत जानकारी
शिविर में बचाव पक्ष की अधिवक्ता पिंकी शर्मा ने छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि इन योजनाओं के तहत आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाती है। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किन परिस्थितियों में और कैसे जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है।
मौलिक अधिकार और कर्तव्यों पर संवाद
अधिवक्ता पिंकी शर्मा ने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान में निहित मौलिक अधिकारों और मौलिक कर्तव्यों के महत्व से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अधिकारों की जानकारी के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करना भी एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। इस संवाद के दौरान विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि कानून केवल दंड का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में न्याय और संतुलन बनाए रखने का साधन है।
स्थायी लोक अदालत और मध्यस्थता की भूमिका
शिविर में स्थायी लोक अदालत और मध्यस्थता केंद्र की कार्यप्रणाली पर भी प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि छोटे और सामान्य विवादों का समाधान अदालत में लंबी प्रक्रिया के बजाय मध्यस्थता के माध्यम से कैसे किया जा सकता है। इससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
हेल्पलाइन सेवाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न आपातकालीन और सहायता हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। इनमें आपातकालीन हेल्पलाइन 112, वन स्टॉप सेंटर हेल्पलाइन 181, साइबर हेल्पलाइन 1930, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 1091 शामिल रहीं। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी संकट की स्थिति में इन नंबरों का सही और त्वरित उपयोग कैसे किया जा सकता है।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए शिविर में साइबर फ्रॉड के विभिन्न तरीकों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने के खतरे और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के उपाय बताए गए। उन्हें यह भी समझाया गया कि साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराना क्यों जरूरी है।
पीड़ित मुआवजा योजनाओं की जानकारी
शिविर में बच्चों और युवाओं को पीड़ित मुआवजा योजनाओं के बारे में भी बताया गया। अधिवक्ता ने समझाया कि अपराध के शिकार लोगों को आर्थिक और कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन सी योजनाएं चलाई जा रही हैं और उनका लाभ कैसे उठाया जा सकता है। यह जानकारी विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रही, जो समाज सेवा और जागरूकता अभियानों से जुड़े हैं।
आयोजन में विभिन्न अधिकारियों की सहभागिता
इस कानूनी जागरूकता शिविर का संचालन डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर पलवल सजल सिंह द्वारा किया गया। अधिकार मित्र धरमवती ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई और विद्यार्थियों से संवाद किया। शिविर का समापन मुख्य अतिथियों असिस्टेंट एडवोकेट जनरल हरियाणा मंदीप सिंह मलिक, ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज शर्मा और एसएनओ हरियाणा डॉ. दिनेश कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने युवाओं से समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
युवाओं की भूमिका पर जोर
अतिथियों ने कहा कि एनएसएस स्वयंसेवक समाज और प्रशासन के बीच सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। यदि युवा कानूनी जानकारी से सशक्त होंगे, तो वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी सही मार्गदर्शन दे सकेंगे। ऐसे शिविर युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।