पलवल जिले में हरियाणा योग आयोग और आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा सूर्य नमस्कार अभियान न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है। यह अभियान जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में जिले के विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, व्यायामशालाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
योग को जन-आंदोलन बनाने का प्रयास
जिला प्रशासन और आयुष विभाग का उद्देश्य योग को केवल अभ्यास तक सीमित न रखकर जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। सूर्य नमस्कार अभियान इसी सोच का परिणाम है, जिसमें सभी आयु वर्ग के लोगों को सरल और वैज्ञानिक योग पद्धति से जोड़ा जा रहा है। जिला योग समन्वयक डॉ. प्रवीन गोयल और सूर्य नमस्कार कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. योगेश यादव की देखरेख में आयुष योग सहायकों द्वारा नियमित रूप से सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
विद्यालयों में बच्चों को योग से जोड़ने पर विशेष जोर
अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों में विशेष योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। राजकीय और आवासीय विद्यालयों में छात्रों को सूर्य नमस्कार के महत्व, सही विधि और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में पहले सूक्ष्म व्यायाम कराए जाते हैं, ताकि शरीर को योग के लिए तैयार किया जा सके, इसके बाद क्रमबद्ध तरीके से सूर्य नमस्कार के राउंड कराए जाते हैं।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि बचपन से ही योग की आदत विकसित होने से विद्यार्थियों में एकाग्रता, अनुशासन और मानसिक स्थिरता बढ़ती है। शिक्षकों ने भी इस अभियान को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताया है।
सूर्य नमस्कार और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि सूर्य नमस्कार केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह श्वसन, ध्यान और संतुलन का समन्वित अभ्यास है। नियमित सूर्य नमस्कार से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं में कमी आती है। यह अभ्यास मन को शांत रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और दिनचर्या में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में योग और सूर्य नमस्कार जैसी भारतीय परंपरागत विधियां एक सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती हैं।
अभियान की समय-सीमा और सांस्कृतिक महत्व
यह सूर्य नमस्कार अभियान 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर शुरू किया गया, जो 12 फरवरी को महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती तक चलेगा। इस अवधि का चयन भारतीय संस्कृति, योग परंपरा और युवाओं में आत्मबल के संदेश को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक और प्रेरणादायी अवसरों से लोगों में योग के प्रति जुड़ाव और जागरूकता बढ़ती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिल रहा सकारात्मक प्रतिसाद
अभियान का दायरा केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। गांवों में भी आयुष योग सहायकों द्वारा सामूहिक योग अभ्यास कराए जा रहे हैं। ग्रामीण नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने इस पहल को अपनाते हुए नियमित योग करने की रुचि दिखाई है। इससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता भी मजबूत हो रही है।
योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान
कार्यक्रमों के दौरान प्रतिभागियों को केवल अभ्यास ही नहीं, बल्कि योग को दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि नियमित योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जीवनशैली संबंधी बीमारियों में कमी आती है और मानसिक संतुलन बना रहता है।
विद्यालयों और संस्थानों में कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा योग को अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली का संकल्प भी लिया जा रहा है।