पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत में प्रदर्शित गोबर से बनी मूर्तियां
सोनीपत के सेक्टर-15 स्थित दशहरा ग्राउंड में चल रही पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत के दूसरे दिन भी उत्साह और भागीदारी का माहौल देखने को मिला। तीन दिवसीय इस आयोजन में स्थानीय कारीगरों के उत्पादों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।प्रदर्शनी स्थल पर बड़ी संख्या में पहुंचे जिलावासियों ने हस्तनिर्मित वस्तुओं को देखा और कारीगरों के कौशल की सराहना की। आयोजन 1 मार्च तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनियां शामिल हैं।
पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा
एमएसएमई विकास कार्यालय, करनाल के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और लघु उद्यमियों को मंच उपलब्ध कराना है। यहां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, घरेलू उत्पाद और स्थानीय कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।दूसरे दिन विशेष रूप से गाय के गोबर से निर्मित मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पर्यावरण के अनुकूल इन कलाकृतियों को दर्शकों ने सराहा और इसे पारंपरिक कौशल व नवाचार का अनूठा उदाहरण बताया।
इंटर कॉलेज गायन प्रतियोगिता में युवा प्रतिभा
प्रदर्शनी के सांस्कृतिक आयाम को मजबूत करते हुए इंटर कॉलेज स्तर की गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई। तीन कॉलेजों के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया और युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।आयोजकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रदर्शनी को केवल व्यापारिक मंच न बनाकर सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र भी बनाती हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनसहभागिता
प्रदर्शनी में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि स्थानीय स्तर पर स्वदेशी उत्पादों के प्रति रुचि बढ़ रही है। ऐसे आयोजनों से कारीगरों को सीधे ग्राहकों से संवाद का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आय और पहचान दोनों में वृद्धि हो सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस प्रकार के मंच नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाएं, तो सूक्ष्म और लघु उद्यमों को स्थायी बाजार मिल सकता है।
निष्कर्ष
समग्र रूप से, पीएम विश्वकर्मा प्रदर्शनी सोनीपत का दूसरा दिन रचनात्मकता, युवा भागीदारी और स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन का प्रतीक रहा। गोबर से बनी मूर्तियों जैसी नवाचारपूर्ण पहल ने यह दिखाया कि पारंपरिक संसाधनों के माध्यम से भी आधुनिक बाजार में स्थान बनाया जा सकता है।